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US Midterm Elections: ट्रंप को लगा बड़ा झटका, दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स का कब्जा; क्या तीसरी बार होगा महाभियोग?

वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए 2026 के मिडटर्म चुनाव के नतीजे बड़ा राजनीतिक बदलाव लेकर आए हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी ने अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट में बहुमत हासिल कर लिया है। इससे ट्रंप प्रशासन के सामने आने वाले दो वर्षों में कई नई राजनीतिक और कानूनी चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। चुनावी नतीजों के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या डेमोक्रेट्स एक बार फिर ट्रंप के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करेंगे? अगर ऐसा होता है तो क्या उन्हें राष्ट्रपति पद से हटाया जा सकता है?

दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स को मिला बहुमत

अमेरिका में 3 नवंबर 2026 को मिडटर्म चुनाव हुए थे। इन चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी ने हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट दोनों में रिपब्लिकन पार्टी को पीछे छोड़ दिया। इसके साथ ही कांग्रेस में ट्रंप की पार्टी का नियंत्रण समाप्त हो गया।

हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में डेमोक्रेट्स ने बहुमत के लिए जरूरी 218 सीटों का आंकड़ा पार किया। वहीं सीनेट में भी पार्टी ने बहुमत हासिल कर लिया। इन नतीजों के बाद ट्रंप प्रशासन के विधायी एजेंडे और सरकारी फैसलों की निगरानी में विपक्ष की भूमिका बढ़ जाएगी।

क्या तीसरी बार ट्रंप के खिलाफ आएगा महाभियोग?

मिडटर्म चुनाव के नतीजों के बाद ट्रंप के खिलाफ तीसरी बार महाभियोग लाने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। दरअसल, अमेरिकी संविधान के तहत राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने और उसे पारित करने का अधिकार हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के पास है।

अब इस सदन में डेमोक्रेट्स के बहुमत में आने से उनके पास महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने का संवैधानिक रास्ता मौजूद है। इसके लिए सदन में साधारण बहुमत से महाभियोग के प्रस्ताव को मंजूरी देनी होती है।

हालांकि, महाभियोग प्रस्ताव पारित होने का मतलब यह नहीं है कि राष्ट्रपति तत्काल पद से हट जाएंगे। इसके बाद मामला सीनेट में जाता है, जहां राष्ट्रपति के खिलाफ सुनवाई होती है।

राष्ट्रपति को हटाने के लिए कितने वोट जरूरी?

अमेरिकी संविधान के मुताबिक, राष्ट्रपति को दोषी ठहराने और पद से हटाने के लिए सीनेट में मौजूद सदस्यों के दो-तिहाई समर्थन की जरूरत होती है। यदि सभी 100 सीनेटर मौजूद हों, तो इसके लिए कम से कम 67 वोट चाहिए।

ऐसे में डेमोक्रेट्स को सीनेट में बहुमत मिलने के बावजूद ट्रंप को पद से हटाने के लिए रिपब्लिकन सांसदों के समर्थन की भी जरूरत पड़ सकती है। यानी महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करना और राष्ट्रपति को पद से हटाना दो अलग-अलग संवैधानिक प्रक्रियाएं हैं। <Cite refs={[“turn411426search0″,”turn411426search2”]}/>

ट्रंप पहले भी दो बार झेल चुके हैं महाभियोग

डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी इतिहास के ऐसे राष्ट्रपति हैं, जिनके खिलाफ एक ही कार्यकाल में दो बार महाभियोग प्रस्ताव पारित हुआ था।

पहला महाभियोग (2019): दिसंबर 2019 में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने ट्रंप के खिलाफ सत्ता के दुरुपयोग और कांग्रेस की जांच में बाधा डालने के आरोपों पर महाभियोग प्रस्ताव पारित किया था। यह मामला यूक्रेन के तत्कालीन राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के साथ उनकी बातचीत से जुड़ा था। हालांकि, फरवरी 2020 में सीनेट ने उन्हें आरोपों से बरी कर दिया।

दूसरा महाभियोग (2021): जनवरी 2021 में अमेरिकी कैपिटल में हुई हिंसा के बाद ट्रंप पर विद्रोह के लिए उकसाने का आरोप लगाया गया। इसके बाद हाउस ने दूसरी बार उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पारित किया। इस बार 57 सीनेटरों ने उन्हें दोषी ठहराने के पक्ष में वोट दिया, लेकिन यह दो-तिहाई बहुमत से कम था। इसलिए उन्हें फिर से बरी कर दिया गया। <Cite refs={[“turn411426search1″,”turn411426search6”]}/>

ट्रंप प्रशासन की जांच कर सकते हैं डेमोक्रेट्स

दोनों सदनों में बहुमत मिलने के बाद डेमोक्रेट्स के पास ट्रंप प्रशासन के कामकाज की जांच और निगरानी करने के अधिक अवसर होंगे। हाउस की विभिन्न समितियां सरकारी फैसलों, प्रशासनिक अधिकारियों और नीतियों से जुड़े मामलों पर सुनवाई कर सकती हैं।

इसके अलावा समितियों को दस्तावेज मांगने और संबंधित अधिकारियों को पूछताछ के लिए बुलाने का अधिकार भी है। डेमोक्रेटिक नेताओं ने प्रशासन की जवाबदेही तय करने और महंगाई जैसे घरेलू मुद्दों पर काम करने की बात कही है।

ट्रंप के लिए आगे की राह क्या होगी?

मिडटर्म चुनाव में दोनों सदनों का नियंत्रण गंवाने के बाद ट्रंप प्रशासन को अब विपक्ष के साथ काम करना होगा। डेमोक्रेट्स सरकारी नीतियों की जांच, प्रशासनिक फैसलों पर सवाल और विधायी प्रस्तावों के जरिए राष्ट्रपति पर राजनीतिक दबाव बना सकते हैं।

हालांकि, तीसरी बार महाभियोग की प्रक्रिया शुरू होगी या नहीं, इस पर अभी कोई अंतिम फैसला सामने नहीं आया है। इतना स्पष्ट है कि डेमोक्रेट्स के पास महाभियोग प्रस्ताव लाने की संसदीय ताकत है, लेकिन ट्रंप को राष्ट्रपति पद से हटाने के लिए सीनेट में दो-तिहाई समर्थन जुटाना अलग और बड़ी संवैधानिक शर्त है।

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