व्यापार जगत

UPI MDR Charges: ₹2,000 से ऊपर UPI पेमेंट पर लग सकता है चार्ज? जानिए ग्राहकों पर क्या होगा असर

नई दिल्ली: UPI से पेमेंट करने वाले करोड़ों लोगों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। 15 अक्टूबर से ₹2,000 से ज्यादा के UPI Person-to-Merchant (P2M) ट्रांजैक्शन पर 0.4 फीसदी Merchant Discount Rate (MDR) लागू होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि इस शुल्क का सीधा बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला जाएगा।

अगर यह व्यवस्था लागू होती है तो इसका असर देश में डिजिटल पेमेंट के पैटर्न पर भी पड़ सकता है। एक सर्वे के मुताबिक, अगर दुकानदार MDR का शुल्क ग्राहकों से वसूलने लगते हैं, तो बड़ी संख्या में लोग UPI के बजाय कैश या कार्ड से भुगतान करना पसंद कर सकते हैं।

67 हजार से ज्यादा UPI यूजर्स के बीच हुआ सर्वे

डिजिटल प्लेटफॉर्म LocalCircles ने 291 जिलों में 67,000 से ज्यादा UPI यूजर्स के बीच सर्वे किया। लोगों से पूछा गया कि अगर ₹2,000 से अधिक के UPI पेमेंट पर दुकानदार उनसे अतिरिक्त शुल्क वसूलता है, तो वे क्या करेंगे।

सर्वे में सामने आया कि:

  • 14% लोग अतिरिक्त शुल्क देकर भी UPI इस्तेमाल जारी रखेंगे।
  • 27% लोग कैश से भुगतान करना पसंद करेंगे।
  • 26% लोग क्रेडिट कार्ड की ओर रुख करेंगे।
  • 14% लोग डेबिट कार्ड का इस्तेमाल करेंगे।
  • कुल मिलाकर 76% यूजर्स अतिरिक्त खर्च से बचने के लिए दूसरे भुगतान माध्यमों का इस्तेमाल कर सकते हैं।

LocalCircles के CEO सचिन टपारिया के मुताबिक, अगर MDR का बोझ ग्राहकों पर डाला जाता है तो इससे UPI के इस्तेमाल पर असर पड़ सकता है।

दुकानदार भी MDR के पक्ष में नहीं

सिर्फ ग्राहक ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में व्यापारी भी प्रस्तावित शुल्क को लेकर असहमत नजर आए। अगस्त में किए गए एक अन्य सर्वे के मुताबिक:

  • 41% मर्चेंट्स ₹2,000 से अधिक के UPI पेमेंट पर कोई MDR नहीं देना चाहते।
  • 17% व्यापारी 0.4% MDR देने के लिए तैयार हैं।
  • 15% का कहना है कि MDR अधिकतम 0.04% होना चाहिए।
  • 9% दुकानदार फिलहाल UPI पेमेंट स्वीकार नहीं करते।

UPI का कितना बड़ा है मर्चेंट मार्केट?

अगस्त 2026 में UPI के जरिए कुल 24.51 अरब ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल वैल्यू करीब ₹29.82 ट्रिलियन रही।

इनमें मर्चेंट यानी दुकानदारों को किए गए पेमेंट की संख्या 15.51 अरब रही, जबकि इनकी कुल वैल्यू करीब ₹8.95 ट्रिलियन थी।

आंकड़ों के मुताबिक मर्चेंट पेमेंट की कुल वैल्यू में करीब 67% हिस्सा ₹2,000 से ज्यादा के ट्रांजैक्शन का है। ऐसे में इस श्रेणी पर MDR लागू होने से UPI के मर्चेंट सेगमेंट पर खास असर पड़ सकता है।

क्या ग्राहकों से सीधे वसूला जाएगा MDR?

यह सबसे अहम सवाल है। सरकार का कहना है कि MDR का बोझ आम ग्राहकों पर नहीं डाला जाएगा।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 22 सितंबर को कहा था कि ग्राहकों से MDR वसूलने की अनुमति नहीं होगी। सरकार इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) के साथ मिलकर ऐसा मैकेनिज्म तैयार करने पर काम कर रही है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि व्यापारी इस शुल्क को ग्राहकों से न वसूलें।

सरकार ने ₹2,000 तक के UPI पेमेंट और RuPay डेबिट कार्ड पेमेंट को चार्ज-फ्री रखने की व्यवस्था भी जारी रखी है।

UPI यूजर्स को अभी क्या समझना चाहिए?

अगर ₹2,000 से ज्यादा के UPI मर्चेंट पेमेंट पर MDR लागू होता है, तो इसका मतलब यह जरूरी नहीं है कि ग्राहक को हर पेमेंट पर अलग से 0.4% देना पड़ेगा। MDR मूल रूप से मर्चेंट से जुड़ा शुल्क है और ग्राहकों से इसकी वसूली की अनुमति अलग सवाल है।

इसलिए फिलहाल ग्राहकों को किसी अतिरिक्त चार्ज को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। अंतिम नियम और शुल्क की व्यवस्था संबंधित आधिकारिक घोषणा के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगी।

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