बिलासपुर रेल हादसा : रेस्क्यू टीम ने मलबे से डेढ़ साल के मासूम ऋषि यादव को ज़िंदा निकाला

बिलासपुर….मंगलवार शाम बिलासपुर रेल मंडल के लालखदान स्टेशन के पास हुए कोरबा मेमू लोकल हादसे ने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया। इस दर्दनाक दुर्घटना में सात लोगों की मौत हो गई, जबकि दर्जनों यात्री घायल हुए हैं। लेकिन हादसे के मलबे से जब रेस्क्यू टीम ने डेढ़ साल के मासूम ऋषि यादव को ज़िंदा निकाला — तो हर आंख नम हो उठी।
देवरी खुर्द निवासी अर्जुन यादव, उसकी पत्नी शीला यादव और डेढ़ वर्षीय बेटा ऋषि, तीनों मंगलवार को किसी काम से चांपा गए थे। लौटते वक्त वे कोरबा-बिलासपुर मेमू लोकल में सवार हुए। अर्जुन ने अपनी बहन को आखिरी बार फोन पर कहा था — “अब बिलासपुर पहुंचने वाले हैं।” लेकिन कुछ ही मिनटों बाद हादसे की खबर आई।
दुर्घटना की सूचना मिलते ही रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। इंजन से जुड़ा यात्री डिब्बा जमीन से ऊँचाई पर झुका हुआ था। टूटे दरवाज़ों को हटाकर जब टीम अंदर घुसी तो दृश्य भयावह था। खून, मलबा और चीखें — फिर भी बचावकर्मियों ने हिम्मत नहीं हारी। जो लोग ज़िंदा दिखे, उन्हें पहले बाहर निकाला गया। फिर एक कोने में पड़ा मिला मासूम ऋषि… ज़िंदा लेकिन गंभीर हालत में।
उसे रेलवे अस्पताल ले जाया गया, बाद में हालत नाज़ुक देख अपोलो अस्पताल रेफ़र किया गया। रात 9 बजे तक उसके माता-पिता की कोई पहचान नहीं हो सकी थी। जब उसकी तस्वीर सोशल मीडिया ग्रुपों में वायरल हुई, तब दयालबंद निवासी सुनील यादव ने पहचान की — वही अर्जुन का साढ़ू था। उसने बताया, अर्जुन और शीला की मौके पर ही मौत हो चुकी थी।
रेलवे और जिला प्रशासन के आंकड़ों में देर रात तक भ्रम की स्थिति बनी रही। पहले चार, फिर छह और आखिरकार सात मौतों की पुष्टि की गई।
मालगाड़ी के ट्रेन मैनेजर शैलेश चंद्रा ने बताया कि उसने मेमू लोकल को तेज़ रफ्तार से आते देखा तो लाल झंडी दिखाकर रोकने की कोशिश की, मगर कुछ ही सेकंड में टक्कर हो गई। लोको पायलट विद्या सागर की मौके पर मौत हो गई, जबकि सहायक पायलट रश्मि राज गंभीर रूप से घायल हैं और अपोलो अस्पताल में भर्ती हैं।
घटना स्थल पर लोहे के मलबे के बीच देर रात तक रेस्क्यू चलता रहा। ट्रैक पर बिखरे बैग, टूटे फोन और बिखरी ज़िंदगियाँ — हादसे की भयावहता बयान कर रहे थे।



