AAP में फिर टूट की आहट? पंजाब के 63 विधायकों पर AAP की नजर, सिसोदिया और सिंह को डैमेज कंट्रोल की कमान

नई दिल्ली। पार्टी के सात राज्यसभा सदस्यों के साथ पाला बदलने वाले राघव चड्डा के बयान से आम आदमी पार्टी (आप) हरकत में आ गई है।
शनिवार काे गुजरात का दौरा बीच में छोड़कर लाैटे पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया की पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल के साथ हुई बैठक में पार्टी को भविष्य के संभावित नुकसान से बचाने पर चर्चा हुई। सूत्रों का कहना है कि इसके बाद पार्टी के नेता संजय सिंह को दिल्ली और सिसोदिया को पंजाब में डैमेज कंट्रोल करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
उधर, पार्टी संगठन की ओर से सभी विधायकों और बचे हुए सांसदों काे निर्देश दिया गया है कि किसी तरह के फोन आने पर उसे रिकाॅर्ड करें और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व काे सूचित करें।
आप भले ही यह बात कह रही है कि राघव चड्ढा और संदीप पाठक के पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो जाने से उन्हें विधायकों को लेकर कोई खतरा नहीं है। मगर सूत्रों का कहना है कि जिस तरह राघव चड्ढा ने बयान दिया है, उससे पार्टी अब इसे गंभीरता से ले रही है।
दरअसल राज्यसभा में उप नेता के पद से हटाए जाने पर चड्ढा ने अपने बयान में आने वाले समय में कुछ बड़ा होने की बात कही थी, मगर उस समय आप नेतृत्व ने इसे गंभीरता से नहीं लिया था, सूत्रों के अनुसार चड्ढा के बयान को लेकर अपने अन्य सांसदों से इस पर विचार विमर्श तक नहीं किया गया। मगर पाला बदल लेने के बाद चड्ढा ने आप विधायकों के संपर्क में होने का फिर से जिस तरह बयान दिया है, इससे आप की चिंता बढ़ी है और आप के शीर्ष नेतत्व ने गुजरात निकाय चुनाव के लिए पीक पर चल रहे प्रचार के बीच सिसाेदिया को वापस दिल्ली बुला लिया।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, पंजाब और दिल्ली में ऐसे कई विधायक हैं, जो लंबे समय से असंतुष्ट हैं, ऐसे विधायकों को लेकर खतरा बना हुआ है। पंजाब में आम आदमी पार्टी के 92 में से कुछ ऐसे विधायक नाराज चल रहे हैं, जो मंत्री पद न मिलने या किन्ही अन्य कारणों से पार्टी से नाराज हैं। इनमें से कई चड्ढा और संदीप पाठक के करीबी माने जाते हैं, वे कमजोर कड़ियां साबित हो सकते हैं। चर्चा तो यहां तक है कि पंजाब के 63 से अधिक विधायक चड्ढा और पाठक के संपर्क में हैं, जो पार्टी के लिए एक बड़ा खतरा बन सकते हैं।
उन विधायकों को कमजोर कड़ी माना जा रहा है जो पूर्व में कांग्रेस या शिरोमणि अकाली दल छोड़कर आए थे। इसके अलावा, माझा और मालवा बेल्ट के कुछ असंतुष्ट विधायक भी पाला बदलने वाले सांसदों के प्रभाव में बताए जा रहे हैं।
हरियाणा के पूर्व नेता नवीन जयहिंद ने दावा किया है कि आने वाले दिनों में पंजाब के लगभग 28 विधायक पार्टी छोड़ सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो पंजाब के विधायकों के बीच चड्ढा और पाठक इन दोनों नेताओं की गहरी पैठ रही है।
चुनावी प्रबंधन के दौरान कई विधायकों के टिकट वितरण में इनकी अहम भूमिका थी, जिसके कारण वे अब भी इनके सीधे संपर्क में हैं। उनके अनुसार पंजाब से आने वाले अशोक मित्तल और हरभजन सिंह का स्थानीय स्तर पर प्रभाव है, जो क्षेत्रीय विधायकों को प्रभावित कर सकते हैं।
आप के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने रविवार को उन दावों को खारिज कर दिया कि पंजाब में पार्टी के विधायक राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा आदि के सपर्क में हैं। उन्होंने इस तरह की बातों को गलत जानकारी और अफवाह बताया।
सिंह ने भाजपा और चड्ढा पर जानबूझकर ये अफवाहें फैलाने का आरोप लगाया और कहा कि चड्ढा और आप छोड़कर भाजपा में शामिल हुए दूसरे राज्यसभा सदस्यों के विश्वासघात के खिलाफ पूरे पंजाब में प्रदर्शन हो रहे हैं।
सिंह ने दावा किया है कि आप और पंजाब को धोखा देने के लिए लोगों की भावना उनके खिलाफ है।



