भाद्रपद पूर्णिमा की शाम इन 5 जगहों पर जरूर जलाएं दीपक, पितरों की कृपा पाने की है मान्यता

हिंदू धर्म में भाद्रपद महीने की पूर्णिमा तिथि का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने के साथ सत्यनारायण भगवान की कथा सुनने की भी परंपरा है। पूर्णिमा की तिथि पितरों के स्मरण और उनके निमित्त किए जाने वाले धार्मिक कार्यों के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
भाद्रपद पूर्णिमा की शाम दीपदान करने की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धा और विधि-विधान से जलाया गया दीपक घर में सुख-शांति और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। साथ ही इस दिन पूर्वजों का स्मरण कर उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाती है।
आइए जानते हैं कि भाद्रपद पूर्णिमा की शाम किन स्थानों पर दीपक जलाने की धार्मिक मान्यता है।
1. मुख्य द्वार पर जलाएं दीपक
पूर्णिमा की शाम घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाना शुभ माना जाता है। मान्यता के अनुसार मुख्य द्वार घर में प्रवेश का प्रमुख स्थान होता है, इसलिए यहां दीपक जलाने से सकारात्मक वातावरण बना रहता है।
दीपक को मुख्य दरवाजे के दाईं ओर रखकर घर की सुख-समृद्धि और शांति के लिए प्रार्थना कर सकते हैं।
2. दक्षिण दिशा में करें दीपदान
धार्मिक मान्यताओं में दक्षिण दिशा का संबंध पितरों से माना जाता है। इसलिए भाद्रपद पूर्णिमा के दिन शाम के समय दक्षिण दिशा की ओर दीपक जलाकर पूर्वजों का स्मरण करने की परंपरा है।
इस दौरान अपने पितरों को याद करते हुए उनकी आत्मिक शांति और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना कर सकते हैं। अपनी भूल-चूक के लिए पितरों से क्षमा मांगने की भी परंपरा है।
3. तुलसी के पौधे के पास जलाएं घी का दीपक
हिंदू घरों में तुलसी के पौधे को विशेष धार्मिक महत्व दिया जाता है। पूर्णिमा के दिन शाम के समय तुलसी के पास दीपक जलाना शुभ माना जाता है।
मान्यता है कि तुलसी के पास दीप प्रज्वलित करने और पूजा करने से भगवान विष्णु तथा मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। दीपक जलाने के बाद तुलसी की परिक्रमा भी की जा सकती है।
4. जल के स्थान के पास करें दीपदान
घर में जहां पानी का मटका, घड़ा, वाटर फिल्टर या अन्य जल रखने की व्यवस्था हो, वहां भी शाम के समय दीपक जलाने की परंपरा कुछ परिवारों में है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जल और दीप का संबंध शुद्धता तथा सकारात्मक ऊर्जा से जोड़ा जाता है। ऐसे में पूर्णिमा के दिन इस स्थान पर दीपक जलाकर घर की सुख-शांति की कामना की जा सकती है।
5. पीपल या बरगद के पेड़ के नीचे जलाएं दीपक
अगर घर के आसपास पीपल का पेड़ हो तो पूर्णिमा की शाम उसके नीचे दीपदान किया जा सकता है। पीपल के साथ बरगद के पेड़ को भी धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
मान्यता के अनुसार इन पेड़ों का संबंध देवी-देवताओं और पितरों से जोड़ा जाता है। इसलिए श्रद्धा के साथ यहां दीपक जलाकर पूर्वजों का स्मरण किया जाता है।
हालांकि पेड़ के नीचे दीपक जलाते समय आग से सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी है। दीपक ऐसी जगह रखें जहां उससे पेड़, सूखे पत्तों या आसपास की किसी वस्तु में आग लगने का खतरा न हो।
पितरों का करें श्रद्धापूर्वक स्मरण
भाद्रपद पूर्णिमा पर दीपदान के साथ अपने पूर्वजों का स्मरण करना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। परिवार की परंपरा के अनुसार इस दिन पितरों के निमित्त दान, तर्पण या अन्य धार्मिक कार्य किए जा सकते हैं।
धार्मिक मान्यताओं का मूल भाव श्रद्धा, कृतज्ञता और पूर्वजों का स्मरण है। इसलिए दीपदान करते समय मन में श्रद्धा रखते हुए परिवार की सुख-शांति और पितरों की आत्मिक शांति के लिए प्रार्थना करें।



