क्रेस्ट ग्रीन्स, रायपुर के निवासियों को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय से बड़ी राहत: बिल्डर को ध्वस्त की गई बाउंड्री वॉल का पुनर्निर्माण करने का निर्देश

- बिल्डर की मनमानी पर न्यायालय का हस्तक्षेप; बुलडोजर से गिराई गई आवासीय परिसर की सुरक्षा दीवार अब दोबारा बनानी होगी
क्रेस्ट ग्रीन्स रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट, रायपुर के निवासियों एवं आवंटियों को माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर से एक बड़ी और महत्वपूर्ण न्यायिक राहत प्राप्त हुई है। आवासीय परिसर की सुरक्षा से जुड़े गंभीर मामले में माननीय उच्च न्यायालय ने बिल्डर मेसर्स रामायण रियल्टर्स प्राइवेट लिमिटेड को ध्वस्त की गई प्रीकास्ट बाउंड्री वॉल का पूर्व की भांति यथाशीघ्र पुनर्निर्माण करने का स्पष्ट निर्देश दिया है। न्यायालय का यह आदेश बिल्डर की कार्रवाई से प्रभावित सैकड़ों निवासियों के लिए बड़ी राहत और उनके अधिकारों की एक महत्वपूर्ण जीत है।
उल्लेखनीय है कि क्रेस्ट ग्रीन्स, रायपुर के आवासीय परिसर की सुरक्षा के लिए पूर्व में निर्मित बाउंड्री वॉल को बिल्डर द्वारा अपने फेज-II एवं फेज-III के निर्माण कार्यों के नाम पर दिनांक 03.11.2026 को अचानक बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया गया।
बिल्डर द्वारा की गई यह कार्रवाई न केवल एकतरफा एवं मनमानीपूर्ण थी, बल्कि निवासियों को बिना किसी पूर्व सूचना अथवा उनकी सहमति के, पुलिस प्रशासन के संरक्षण में अंजाम दी गई। बाउंड्री वॉल ध्वस्त किए जाने से पूरा आवासीय परिसर असुरक्षित हो गया तथा बाहरी व्यक्तियों, अनधिकृत लोगों एवं असामाजिक तत्वों के प्रवेश की आशंका गंभीर रूप से बढ़ गई। इस मनमानी कार्रवाई से न केवल निवासियों, विशेषकर महिलाओं, बच्चों एवं वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा उत्पन्न हुआ, बल्कि उनके शांतिपूर्ण, सुरक्षित एवं संरक्षित आवासीय जीवन के अधिकार पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।
इस संबंध में क्रेस्ट ग्रीन्स रेजिडेंशियल को-ऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड द्वारा अधिवक्ता श्री अभिनव कारडेकर के माध्यम से माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में रिट याचिका प्रस्तुत की गई, जिसमें ध्वस्त की गई प्रीकास्ट बाउंड्री वॉल का पूर्ववत पुनर्निर्माण सुनिश्चित करने हेतु अंतरिम राहत की मांग की गई। दिनांक 05.11.2026 को माननीय न्यायमूर्ति श्री अमितेन्द्र किशोर प्रसाद की पीठ के समक्ष आवेदन पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान सोसायटी की ओर से माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष बाउंड्री वॉल ध्वस्त किए जाने से उत्पन्न सुरक्षा संबंधी गंभीर चिंताओं को रेखांकित करते हुए बिल्डर को बाउंड्री वॉल का पुनर्निर्माण करने हेतु अंतरिम निर्देश जारी किए जाने का अनुरोध किया गया।
माननीय उच्च न्यायालय ने दोनों पक्षों के प्रस्तुत तर्कों एवं उपलब्ध अभिलेखों पर विचार करने के पश्चात बिल्डर को पूर्व में निर्मित प्रीकास्ट बाउंड्री वॉल का पुनर्निर्माण यथाशीघ्र करने का स्पष्ट निर्देश दिया। न्यायालय ने अपने आदेश में विशेष रूप से उल्लेख किया कि बाउंड्री वॉल के ध्वस्त होने से सोसायटी के निवासी बाहरी व्यक्तियों के अनधिकृत प्रवेश एवं हस्तक्षेप की आशंका से प्रभावित हो रहे हैं। इसी सुरक्षा संबंधी चिंता को ध्यान में रखते हुए न्यायालय ने निर्देशित किया कि बाउंड्री वॉल का पुनर्निर्माण इस प्रकार किया जाए कि निवासियों को अनधिकृत प्रवेश की आशंका का सामना न करना पड़े। इस प्रकार, माननीय उच्च न्यायालय ने सोसायटी के अंतरिम राहत आवेदन को स्वीकार करते हुए निवासियों को महत्वपूर्ण अंतरिम संरक्षण प्रदान किया।
माननीय उच्च न्यायालय का यह आदेश क्रेस्ट ग्रीन्स के समस्त आवंटियों एवं निवासियों के लिए एक बड़ी और महत्वपूर्ण राहत है। इससे न केवल आवासीय परिसर की सुरक्षा पुनः सुनिश्चित होने का मार्ग प्रशस्त हुआ है, बल्कि निवासियों के वैध हितों एवं अधिकारों को भी न्यायिक संरक्षण प्राप्त हुआ है।
इस आदेश से यह स्पष्ट संदेश गया है कि बिल्डर अपने व्यावसायिक एवं निर्माण संबंधी हितों की आड़ में आवासीय परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को मनमाने ढंग से समाप्त नहीं कर सकते। किसी भी विकास कार्य की आड़ में वहां निवासरत परिवारों की सुरक्षा, सुविधा एवं शांतिपूर्ण आवासीय जीवन को खतरे में नहीं डाला जा सकता। आवंटियों एवं निवासियों के अधिकारों की अनदेखी कर की गई ऐसी एकतरफा कार्रवाइयों के विरुद्ध माननीय न्यायालय का हस्तक्षेप इस बात का प्रमाण है कि निवासियों के वैध हितों एवं अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायिक संरक्षण उपलब्ध है।
क्रेस्ट ग्रीन्स के निवासियों के लिए यह केवल बाउंड्री वॉल के पुनर्निर्माण का आदेश नहीं, बल्कि उनकी सामूहिक आवाज, सुरक्षा एवं अधिकारों को मिली एक महत्वपूर्ण न्यायिक जीत है। माननीय उच्च न्यायालय के इस आदेश से निवासियों में सुरक्षा एवं न्याय के प्रति विश्वास और मजबूत हुआ है।








