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तेल-गैस फिर होगा महंगा! ईरान बढ़ाएगा जंग का दायरा, तो भारत में क्यों मचेगा हाहाकार? जानिए

अमेरिका की ओर से जारी हमलों के बीच ईरान अब युद्ध को बढ़ाने की तैयारियां शुरू कर कर दी है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अगर अमेरिकी सेना द्वारा ईरान के पावर इन्फ्रास्ट्रक्चर पर अटैक होता है, तो ईरान ने यमन के यूती विद्रोही संगठन से लाल सागर (Red Sea) के अहम तेल मार्ग को बंद करने के लिए तैयार रहने को कहा है।

रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के साथ लाल सागर में भी आवाजाही बाधित होती है तो तेल और गैस समेत कई अन्य जरूरी सामान की सप्लाई का संकट खड़ा सकता है।

सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में जानकारी दी गई है कि लाल सागर के मार्ग को बंद करने के प्रस्ताव पर ईरान के टॉप लीडरशिप के बीच चर्चा हुई है और यह सूचना हूती संगठन को दे दिया गया है। ईरान के दो सीनियर अधिकारियों और क्षेत्रीय मामलों से जुड़े एक सूत्र के अनुसार, हार ही में हूतियों को तेहरान की यह इच्छा बता दी गई है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि यह सूचना अमेरिका राष्ट्रपति द्वारा मंगलवार को ईरान के पावर इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले की चेतावनी देने से पहले भेजा गया था, या उनके बयान के बाद भेजा गया है।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, हूती संगठन के एक नजदीकी एक सूत्र ने बताया कि संगठन लाल सागर के एंट्री प्वाइंट बाल-अल-मंदेब जलडमरुमध्य के नजदीक जहाजों पर अटैक करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। इसके लिए रणनीतिक रूप से यमन के हुदेदा और अदन की खाड़ी के आसपास ऊंचे इलाकों में मिसाइलें और ड्रोन तैनात कर दिए गए हैं अब सिर्फ आदेश का इंतजार है।

अमेरिका और ईरान के बीच जारी जंग में अगर लाल सागर और बाब-अल-मंदेब मार्ग बंद होता है, तो पूरी दुनिया में ईंधन संकट गहरा सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो ईरान पहले ही होर्मुज बंद कर चुका है। अब हूती संगठन लाल सागर को अस्थिर करते हैं, तो पश्चिम एशिया के दोनों प्रमुख तेल निर्यात मार्ग एक साथ प्रभावित हो जाएंगे, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ सकता है। सूत्रों ने बताया कि यमन में मौजूद ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रतिनिधि यह तय करेंगे कि बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य को कब बंद करना है।

इस बीच क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। हूती विद्रोहियों ने सोमवार को अपने नियंत्रण वाले एक हवाई अड्डे पर बमबारी का आरोप लगाते हुए सऊदी अरब पर मिसाइलें दागीं। इसके साथ ही दोनों पक्षों के बीच चार साल से चला आ रहा संघर्षविराम भी टूट गया।

मीडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध का भारत पर भी बुरा असर पड़ेगा। पिछले 5 महीने से जारी संघर्ष के दौरान भारत में पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिली। ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी होने के बाद महंगाई बढ़ने का खतरा और बढ़ सकता है। जून महीने के खुदरा और थोक महंगाई में रिकॉर्ड वृद्धि देखने को मिली, जिसमें महंगे इंधन एक अहम कारण रहे। पहले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और अब लाल सागर बंद होता है, तो भारत में ईंधन आपूर्ति पर असर देखने को मिल सकता है। इसके अलावा कई अन्य सामानों का आयात और निर्यात दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

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