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चंद्र ग्रहण में जप-तप, मंदिरों के कपाट खुलते ही भक्तों ने किए दर्शन, गंगा घाटों पर भी उमड़ा जनसैलाब

7-8 सितंबर की रात में देशभर में चंद्र ग्रहण लगा हुआ था। चंद्र ग्रहण लगने से 9 घंटे पहले से ही देशभर के प्रमुख मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए थे। चंद्र ग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक लग जाता है, जिस वजह से मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। ग्रहण की समाप्ति के बाद ही मंदिरों के कपाट खुलते हैं। ग्रहण के दौरान आस्था और धार्मिक परंपरा का अद्भुत नजारा देखने को मिला। ग्रहण के समय मंदिरों के कपाट बंदथे और भक्त ने घर में रहकर ही जप-तप, ध्यान और दान पुण्य कर रहे थे। कुछ भक्त ग्रहण काल में गंगा, यमुना के तट पर भी साधना कर रहे थे।

ग्रहण मोक्ष के बाद मंदिरों में उमड़ा आस्था का ज्वार

ग्रहण का समापन रात्रि में 1 बजकर 26 मिनट में हुआ। रात होने की वजह से मंदिर के कपाट बंद ही रहे। मंदिर के कपाट 8 सितंबर यानी आज सुबह खोले गए। जैसे ही कपाट खुले, भक्तों की बड़ी संख्या दर्शन के लिए पहुंच गई। मंदिर परिसर में भगवान के नाम के जयकारे गूजने लगे। सभी मंदिरों में ग्रहण के बाद पारंपरिक नियमों का पालन करते हुए शुद्धिकरण के बाद ही देव प्रतिमाओं का अभिषेक और विशेष पूजन किया गया। कई मंदिरों में आज विशेष आरती, भोग की व्यवस्था भी की गई।

ग्रहण के समय किया गया तप होता है लाभदायक

चंद्र ग्रहण को धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जाता है। इस समय किया गया जप-तप और दान कई गुना फल देता है। इसी कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु घरों और आश्रमों में मंत्रजप, हवन और साधना में जुटे रहे।

गंगा स्नान और पुण्य लाभ

ग्रहण समाप्त होने के बाद गंगा घाटों पर स्नान का भी विशेष महत्व माना जाता है। काशी, हरिद्वार और प्रयागराज में हजारों श्रद्धालु रात के समय ही गंगा स्नान कर पुण्य लाभ लेते दिखे। आचार्यों का मानना है कि ऐसे अवसर आत्मशुद्धि और साधना के लिए अत्यंत अनुकूल होते हैं।

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