भारतसियासी गलियारा

पटना चक्कर काटने से नहीं मिलेगा टिकट, तेजस्वी की विधायकों को चेतावनी, कहा- खुद कैंडिडेट नहीं बनें

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने पूरे दमखम के साथ विधानसभा के चुनावी मैदान में उतरने का निर्णय लिया है। पार्टी ने विधायकों को क्षेत्र में ही रहने की नसीहत दी। कमजोर प्रदर्शन वाले विधायकों को चेतावनी दी गई और अभी से भी काम करने को कहा गया। अपने सरकारी आवास एक पोलो रोड में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने पार्टी नेताओं के साथ बैठक में कहा कि चक्कर काटने से टिकट नहीं मिलेगा। विधायकों को भरोसा बनाए रखने को कहा।

साथ ही तेजस्वी यादव ने पार्टी नेताओं को खुद से प्रत्याशी घोषित करने से बचने की हिदायत दी। बैठक में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने पार्टी नेताओं से 60 दिनों का समय मांगा और कहा कि बदले में हम आपको सरकार बनाकर देंगे। दल के सभी सांसद, विधायक, पराजित प्रत्याशी और दल के वरीय पदाधिकारियों के साथ तेजस्वी ने दो घंटे तक बैठक की।

बैठक में तेजस्वी ने पार्टी नेताओं के सभी सवालों का जवाब दिया और उनसे फीडबैक लिए। उन्होंने कहा कि बूथ स्तर पर तैयारी करनी है। टिकट के लिए सर्वे कराया गया है। उसी आधार पर उम्मीदवार तय होंगे। पटना का चक्कर काटने से टिकट नहीं मिलेगा। गठबंधन की राजनीति में सभी को साथ लेकर चलना है। अगर किसी को टिकट नहीं मिला तो हम उनका भी ख्याल रखेंगे और बाद में एडजस्ट करेंगे। पार्टी पदाधिकारियों ने अगर सही तरीके से काम नहीं किया तो उनकी भी छुट्टी होगी। उन्होंने कहा कि हमें हर मोड़ पर भाजपा को जवाब देना है।

अब बिहार में जदयू या नीतीश कुमार कोई एजेंडा नहीं हैं। हम उनका सम्मान करते हैं पर वे दया के पात्र हैं। उनकी अवस्था का अनुचित लाभ भाजपा उठा रही है। बिहार में समाजवादी विचारधारा को कमजोर करने की कोशिश हो रही है। नफरत और साम्प्रदायिकता की राजनीति की दुकान चलाने की साजिश हो रही है।

तेजस्वी ने कहा कि हमें इस सरकार की पोल खोलनी है। हमारी घोषणाओं की नकल हो रही है। इस सरकार में कोई विजन नहीं है। हमें केवल सरकार नहीं बनानी है, बिहार को बदलना है। रोजगार के अवसर खुलेंगे तो किसी भी बिहारी को बाहर जाने की जरूरत नहीं होगी। पार्टी नेताओं को मतदाता सूची पर नजर बनाए रखने को कहा गया। किसी जीवित का नाम न छूटे और मृत व्यक्ति या फर्जी का नाम जुड़ न जाए, इसका ध्यान रखने को कहा गया। न केवल अपना या परिवार बल्कि नाते-रिश्तेदार, पड़ोसी और ग्रामीणों का नाम भी वोटर लिस्ट में जुड़वाने का टास्क सौंपा गया। दलित और वंचित तबके का खास ख्याल रखने को कहा गया। वोटर अधिकार यात्रा की सफलता और जनता का समर्थन मिलने की भी चर्चा हुई।

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