Cyclone Murasu का असर: आंध्र प्रदेश-तेलंगाना में भारी बारिश का अलर्ट, छत्तीसगढ़ में भी बरसेंगे बादल; जानें दिल्ली का मौसम

नई दिल्ली। चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ (Murasu) कमजोर होकर डिप्रेशन में बदल गया है, लेकिन इसका असर अभी खत्म नहीं हुआ है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, 4 नवंबर की सुबह 5:30 बजे यह सिस्टम तटीय आंध्र प्रदेश और उससे सटे पूर्वी तेलंगाना के ऊपर सक्रिय था। इसके अगले 12 घंटों में और कमजोर होकर कम दबाव के क्षेत्र में बदलने की संभावना है। हालांकि, इसके प्रभाव से आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में बारिश का दौर जारी रह सकता है।
आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में भारी बारिश की चेतावनी
मुरासु के कमजोर होने के बावजूद मौसम विभाग ने तटीय आंध्र प्रदेश और यनम में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश की आशंका जताई है। तेलंगाना के कुछ हिस्सों में भी तेज बारिश हो सकती है। इसके अलावा गरज-चमक और बिजली गिरने की घटनाओं को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
मौसम विभाग के अनुसार, सिस्टम के आगे बढ़ने के साथ बारिश का असर आसपास के क्षेत्रों में भी देखने को मिल सकता है। इसलिए निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
छत्तीसगढ़ में भी बारिश का अलर्ट
चक्रवात मुरासु का असर छत्तीसगढ़ में भी देखने को मिल सकता है। दक्षिण छत्तीसगढ़ में 4 नवंबर को कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है। राज्य के कई अन्य हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।
लगातार बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव और कुछ जगहों पर आवागमन प्रभावित होने की आशंका है। गरज-चमक के दौरान लोगों को खुले स्थानों, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने की सलाह दी जाती है।
अचानक बाढ़ और जलभराव का खतरा
IMD ने तटीय आंध्र प्रदेश और यनम के कुछ जलग्रहण क्षेत्रों में अचानक बाढ़ का मध्यम खतरा जताया है। प्रकाशम, पलनाडु, बापटला, गुंटूर, कृष्णा, NTR, एलुरु, पूर्वी गोदावरी, पश्चिमी गोदावरी, कोनासीमा और काकीनाडा जैसे जिलों में विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है।
जिन इलाकों में पहले से बारिश के कारण मिट्टी में नमी अधिक है, वहां पानी तेजी से बह सकता है। इससे निचले क्षेत्रों में जलभराव और स्थानीय स्तर पर बाढ़ जैसी स्थिति बन सकती है।
हवा की रफ्तार और समुद्र की स्थिति में कब होगा सुधार?
तूफान के कमजोर होने के साथ हवा की गति में भी कमी आने की संभावना है। 4 नवंबर की सुबह तक आंध्र प्रदेश के तट और पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के आसपास 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। झोंकों की गति 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की आशंका है।
समुद्र की स्थिति भी शुरुआत में खराब रह सकती है। हालांकि, मौसम प्रणाली के कमजोर पड़ने के साथ इसमें धीरे-धीरे सुधार होने का अनुमान है।
मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की सलाह
मौसम विभाग ने मछुआरों को 4 नवंबर की सुबह तक पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी और आंध्र प्रदेश के तट के आसपास समुद्र में न जाने की सलाह दी है। इस दौरान मछली पकड़ने की गतिविधियां रोकने को कहा गया है। समुद्र में मौजूद मछुआरों को भी मौसम संबंधी आधिकारिक निर्देशों का पालन करना चाहिए।
दिल्ली-NCR में कैसा रहेगा मौसम?
दिल्ली-NCR में 4 नवंबर को आसमान मुख्य रूप से साफ रहने और सुबह के समय हल्की धुंध छाए रहने की संभावना है। अधिकतम तापमान 27 से 29 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 14 से 16 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है। इस दौरान उत्तर-पश्चिम दिशा से 10 से 15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान है।
मौसम विभाग की सलाह: मुरासु कमजोर जरूर पड़ गया है, लेकिन इससे जुड़े बारिश और तेज हवाओं के प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। प्रभावित राज्यों के लोगों को स्थानीय प्रशासन और IMD की ताजा चेतावनियों पर नजर रखनी चाहिए।



