महाराष्ट्र में भारी बारिश का असर, कोयना बांध के 6 गेट खुले; गिरना डैम भी भरने की कगार पर

महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में जारी मूसलाधार बारिश के चलते राज्य के प्रमुख जलाशयों का जलस्तर रिकॉर्ड गति से बढ़ रहा है। पश्चिमी महाराष्ट्र के सातारा जिले में स्थित प्रसिद्ध कोयना बांध के जलग्रहण क्षेत्र में लगातार हो रही भारी बारिश को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षात्मक कदम उठाए हैं। जलस्तर को नियंत्रित रखने के लिए गुरुवार शाम 5 बजे कोयना बांध के 6 रेडियल गेट 1 फुट तक खोल दिए गए हैं।
बांध प्रबंधन के अनुसार, कोयना डैम के रेडियल गेट खोलकर 5,079 क्यूसेक पानी कोयना नदी में छोड़ा जाएगा। इससे पहले, कोयना बांध के पाद (KDPH) विद्युत गृह की एक इकाई चालू होने के कारण 1,050 क्यूसेक पानी पहले से ही नदी में छोड़ा जा रहा था। अब दोनों को मिलाकर कोयना नदी में कुल 6,129 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज शुरू हो गया है।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश की तीव्रता इसी तरह बनी रही या आवक (Inflow) बढ़ी, तो बांध से पानी छोड़ने की मात्रा को और अधिक बढ़ाया जा सकता है।
काेयना बांध से छोड़े जाने वाले पानी के कारण कोयना नदी का जलस्तर बढ़ने की संभावना है। इसके मद्देनजर सातारा जिला प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले नागरिकों से सतर्क रहने और नदी में प्रवेश न करने की अपील की है। साथ ही, नदी तट के गांवों के ग्राम प्रशासन व संबंधित विभागों को भी जरूरी सावधानी बरतने और स्थिति पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
दूसरी ओर, उत्तर महाराष्ट्र के जलगांव जिले की लाइफलाइन कहे जाने वाले गिरना डैम का भी जलस्तर बढ़ा है। डैम में गुरुवार सुबह तक 94 प्रतिशत पानी जमा हो चुका है। अभी करीब 3 हजार क्यूसेक पानी आ रहा है। इससे डैम के जल्द ही अपनी पूरी क्षमता तक भरकर ओवरफ्लो होने की संभावना है।
22 जुलाई को गिरना डैम में पानी का स्टोरेज सिर्फ 40.38 प्रतिशत था, लेकिन ऊपरी हिस्सों में भारी बारिश की वजह से सिर्फ 8 दिनों में पानी का स्तर 54 प्रतिशत बढ़ा है। इससे भड़गांव, पचोरा, चालीसगांव और जलगांव तालुका के किसानों व लोगों को राहत मिली है, जो गिरना प्रोजेक्ट पर निर्भर हैं। डैम ओवरफ्लो होने की स्थिति में यहां से पानी छोड़ने का फैसला लिया जा सकता है।



