स्वाहा’ बोलते समय आहुति देने की सही विधि, इन उंगलियों का रखें खास ध्यान

हवन को हिंदू धर्म में महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान माना जाता है। इसमें अग्नि को घी, हवन सामग्री और विभिन्न पूजन सामग्रियों की आहुति दी जाती है। इस दौरान मंत्रों का उच्चारण किया जाता है और मंत्र के अंत में ‘स्वाहा’ बोलकर आहुति अग्नि को समर्पित की जाती है। हवन की विधि में कई छोटी-छोटी बातों का भी ध्यान रखने की परंपरा है, जिसमें आहुति देने का तरीका और उंगलियों की मुद्रा भी शामिल है।
हवन के लिए कौन-कौन सी सामग्री जरूरी?
घर पर हवन करने के लिए सबसे पहले पूजा स्थल को तैयार किया जाता है। इसके बाद हवन कुंड, समिधा, आम की लकड़ी, जौ, तिल, अक्षत, घी, गुड़, सूखा नारियल, कपूर, शहद, मिश्री या बताशा, पुष्प, शुद्ध जल और दीपक-बाती जैसी सामग्री एकत्र की जाती है। अलग-अलग पूजा विधियों के अनुसार सामग्री में कुछ बदलाव भी हो सकता है।
आहुति देते समय किन उंगलियों का करें इस्तेमाल?
धार्मिक मान्यता के अनुसार हवन में आहुति देते समय तर्जनी यानी इंडेक्स फिंगर का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। पारंपरिक विधि में अंगूठे के साथ मध्यमा और अनामिका उंगली की सहायता से हवन सामग्री अग्नि को अर्पित करने की बात कही गई है। इसे आहुति देने की पारंपरिक मुद्रा माना जाता है।
‘स्वाहा’ बोलकर क्यों दी जाती है आहुति?
हवन में मंत्रों का विशेष महत्व माना जाता है। सामान्य तौर पर मंत्र का उच्चारण करने के बाद अंत में ‘स्वाहा’ बोलते हुए आहुति अग्नि को समर्पित की जाती है। धार्मिक परंपरा के अनुसार गणेश जी, नवग्रह, पंचदेवता, कुल देवता, ग्राम देवता, स्थान देवता और पितृ देवता आदि के लिए भी आहुति दी जाती है। इसके बाद अपने आराध्य देवी-देवता या गायत्री मंत्र का जाप करते हुए आहुति देने की परंपरा है।
दाहिने हाथ से आहुति देने की मान्यता
पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों में दाहिने हाथ को शुभ माना जाता है। इसी वजह से हवन के दौरान भी दाहिने हाथ से आहुति देने की परंपरा बताई गई है। धार्मिक मान्यताओं में अनामिका उंगली का भी विशेष महत्व माना जाता है। इसके नीचे के हिस्से को सूर्य पर्वत कहा जाता है और इसे ऊर्जा, तेज तथा सफलता से जोड़कर देखा जाता है।
अलग-अलग परंपराओं में हो सकता है अंतर
हवन की विधि और आहुति देने के नियम अलग-अलग धार्मिक परंपराओं, संप्रदायों और पूजा पद्धतियों के अनुसार बदल सकते हैं। इसलिए किसी विशेष अनुष्ठान में आहुति देने से पहले संबंधित पूजा विधि या आचार्य द्वारा बताए गए नियमों का पालन करना उचित माना जाता है।



