सेहतमंद शिशु के लिए दुरुस्त रखें पेट की सेहत, डॉक्टर ने बताया कैसे पड़ता है बच्चे की इम्यूनिटी पर असर

गर्भावस्था के दौरान एक महिला का शरीर कई बदलावों का सामना करता है। मॉर्निंग सिकनेस से लेकर अटपटी चीजें खाने तक बहुत से नए अनुभव इस दौरान गर्भवती महिला को होते हैं। इन नौ महीनों के दौरान मां के गर्भ में पल रहा शिशु सारा पोषण अपनी मां से ही प्राप्त करता है, इसलिए गर्भवती महिला को पौष्टिक भोजन खाने की सलाह दी जाती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि इन नौ महीनों के दौरान गर्भवती महिला के आंतों की सेहत होनेवाले शिशु के विकास को भी प्रभावित कर सकती है, इसलिए गर्भवती महिला के पाचन तंत्र का दुरुस्त रहना बहुत आवश्यक है।
क्यों जरूरी है दुरुस्त पाचन तंत्र
गर्भावस्था के दौरान गैस, अपच और खट्टी डकार जैसी पाचन संबंधी समस्याएं होना आम बात है। लेकिन समय रहते सही निदान न होने पर इसका प्रभाव अजन्मे शिशु की सेहत पर भी पड़ सकता है। गर्भवती महिला के शरीर में होनेवाले हार्मोनल परिवर्तन पाचन संबंधी परेशानियों को बढ़ा देते हैं। ऐसा होने पर गर्भाशय को शिथिल कर देनेवाला प्रोजेस्टेरोन नामक हार्मोन पेट की मांसपेशियों को भी शिथिल कर देता है, जिससे पाचन तंत्र सुस्त पड़ जाता है। इसके अलावा शिशु का बढ़ता आकार भी गर्भाशय को पेट पर दबाव डालने के लिए मजबूर करने लगता है, जिसकी वजह से सीने में जलन, पेट फूलना, कब्ज और एसिडिटी जैसी परेशानियां होने लगती हैं। ऐसा होने पर शरीर आयरन और कैल्शियम जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्वों सहित अन्य पोषक तत्त्व भी पर्याप्त मात्रा में ग्रहण नहीं कर पाता है।
बच्चे पर भी पड़ता है असर
आकाश हेल्थकेयर में गाइनेकोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. मधुलिका सिन्हा कहती हैं, ‘गर्भवती महिला की आंतों का स्वास्थ्य गर्भ में पल रहे बच्चे पर भी पूरा असर डालता है। असल में जब बच्चा सामान्य प्रसव से जन्म लेता है, तो जन्म नलिका से गुजरते समय वह उसमें मौजूद कुछ सूक्ष्मजीवों को निगल लेता है। ये सूक्ष्मजीव नवजात शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता के विकास, पाचन प्रक्रियाओं और आनेवाले कई वर्षों तक एलर्जी के प्रबंधन को बड़े स्तर पर प्रभावित करते हैं। ऐसे में गर्भवती महिला का खराब पाचन तंत्र गर्भावस्था को कठिन बना सकता है। जैसे गभर्वती महिला की आंत का माइक्रोबायोम कम होने सेे खून में शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने, वजन नियंत्रित करने और कुछ पोषक तत्वों के अवशोषित करने में परेशानी हो सकती है। ऐसा होने पर डायबिटीज, उच्च रक्तचाप और बहुत ज्यादा वजन बढ़ने की समस्या हो सकती है, जिससे बच्चे का विकास भी प्रभावित हो सकता है।’ गर्भावस्था के दौरान अपने पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने के लिए निम्न बातें अपनाएं :
पर्याप्त मात्रा में फाइबर का सेवन
एक गर्भवती महिला को रोजाना 25 से 30 ग्राम फाइबर की जरूरत होती है। इस जरूरत को पूरा करने के लिए अपने आहार में साबुत अनाज, दालें, बीन्स, हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, सेब, केला और संतरा शामिल करें। इससे भरपूर मात्रा में फाइबर तो मिलेगा ही, साथ ही पाचन के लिए महत्वपूर्ण गुड बैक्टीरिया में भी बढ़ोतरी होगी।
पानी पिएं खूब
शरीर में पानी की कमी न होने दें क्योंकि पानी पेट को सक्रिय रखता है। एक दिन में कम से कम दो से तीन लीटर पानी जरूर पिएं। साथ ही नारियल पानी, छाछ, नीबू पानी और सत्तू जैसे पेय पदार्थों का सेवन भी अवश्य करें।
न भूलें प्रीबायोटिक्स
यह एक खास प्रकार का फाइबर होता है,जो आंतों में मौजूद गुड बैक्टीरिया को पोषण देता है। लहसुन, प्याज, ओट्स, शतावरी और केले में यह भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इन खाद्य पदार्थों को अपने आहार में नियमित रूप से शामिल करें।
डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों से दूरी
प्रोसेस्ड फूड या प्रसंस्कृत आहार में चीनी, नमक, संतृप्त वसा और प्रिजर्वेटिव्स की अत्यधित मात्रा होती है। ऐसी चीजों का अत्यधिक सेवन आंतों के माइक्रोबायोम के संतुलन बिगड़ देता है। बर्गर, पिज्जा, नूडल्स, कोल्ड ड्रिंक्स, चिप्स और कुकीज जैसी चीजों के सेवन से परहेज रखने में ही भलाई है।
घर के बने ताजे भोजन का सेवन
गर्भावस्था में अक्सर बहुत खट्टा या तीखा खाना खाने का मन करता है। ऐसा भोजन स्वादिष्ट तो लगता है, लेकिन रोजाना खाने से पाचन संबंधी समस्याएं पैदा कर सकता है, इसलिए नियमित रूप से घर पर बने ताजे और आसानी से पचनेवाले भोजन का ही सेवन करना चाहिए। लौकी, तुरई, टिंडे जैसी सब्जियां हल्की होने के साथ-साथ पेट को ठंडक भी पहुंचाती हैं। इस बात का भी खयाल रखें कि भोजन ताजा ही बना हो क्योंकि बासी खाना अपच और गैस की समस्या पैदा कर सकता है।
नियमित व्यायाम है जरूरी
गर्भावस्था कोई बीमारी नहीं बल्कि एक खूबसूरत अनुभव है। इस अवस्था में आराम तो जरूरी होता है, लेकिन हल्की-फुल्की कसरत भी अवश्य करनी चाहिए। सैर पर जाना, योग की सरल मुद्राएं, तैराकी या आराम से की जा सकनेवाली स्ट्रेचिंग से पाचन सक्रिय रहता है और मूड भी अच्छा बना रहता है।



