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बस्तर दशहरा में मुरिया दरबार का नाम बदलने पर बवाल, आदिवासी परंपरा को लेकर गरमाई सियासत

बस्तर। छत्तीसगढ़ के बस्तर में ऐतिहासिक मुरिया दरबार के नाम को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। बस्तर दशहरा के कार्यक्रम की सूची में मुरिया दरबार की जगह आम दरबार लिखे जाने के बाद राजनीतिक विरोध शुरू हो गया है। 23 अक्टूबर को आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के शामिल होने की जानकारी है। ऐसे में नाम परिवर्तन का मुद्दा अब राजनीतिक और सांस्कृतिक बहस का केंद्र बन गया है।

मुरिया दरबार की जगह आम दरबार लिखने पर आपत्ति

कार्यक्रम की सूची में नाम बदलने को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। विरोध करने वालों का कहना है कि मुरिया दरबार केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि बस्तर की ऐतिहासिक पहचान और आदिवासी समाज की परंपरा से जुड़ा महत्वपूर्ण मंच है। ऐसे में इसके नाम में बदलाव से लोगों की भावनाएं आहत हो सकती हैं।

विधायक विक्रम मंडावी ने जताया विरोध

बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी ने नाम परिवर्तन पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने इसे बस्तर की सांस्कृतिक विरासत और आदिवासी समाज की परंपराओं का अपमान बताया है। विधायक ने सरकार से कार्यक्रम की सूची में मुरिया दरबार का पुराना नाम बहाल करने की मांग की है। मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है।

1875 से चली आ रही है ऐतिहासिक परंपरा

मुरिया दरबार का इतिहास वर्ष 1875 से जुड़ा बताया जाता है। रियासत काल में इस दरबार के माध्यम से आदिवासी समाज के प्रतिनिधि तत्कालीन राजा के सामने अपनी समस्याएं और मांगें रखते थे। मांझी, चालकी, पुजारी और अन्य प्रतिनिधियों की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका होती थी।

समय के साथ शासन व्यवस्था में बदलाव आया, लेकिन मुरिया दरबार बस्तर दशहरा की प्रमुख परंपराओं में शामिल रहा। आज भी इसे आदिवासी समाज की भागीदारी, संवाद और सांस्कृतिक पहचान के महत्वपूर्ण मंच के रूप में देखा जाता है।

राष्ट्रपति के दौरे से पहले बढ़ी राजनीतिक हलचल

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के 23 अक्टूबर को बस्तर दौरे के कार्यक्रम के बीच यह विवाद सामने आया है। एक ओर राष्ट्रपति के आगमन को लेकर तैयारियां चल रही हैं, वहीं दूसरी ओर मुरिया दरबार के नाम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।

अब सरकार के रुख पर टिकी निगाहें

मुरिया दरबार का नाम बदलने को लेकर उठे विवाद के बीच अब सबकी निगाहें सरकार और प्रशासन के अगले कदम पर हैं। विरोध करने वाले पुराने नाम को बहाल करने की मांग कर रहे हैं। हालांकि, नाम में बदलाव के पीछे का आधिकारिक कारण स्पष्ट होने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति साफ हो सकेगी।

बस्तर दशहरा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक भी है। ऐसे में मुरिया दरबार के नाम को लेकर उठा विवाद आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है।

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