खेल जगत

शीतल देवी ने रचा इतिहास, 704 अंक के साथ विश्व रिकॉर्ड की बराबरी; पायल नाग ने भी दिखाया दम

नई दिल्ली। भारतीय पैरा तीरंदाजी की स्टार खिलाड़ी शीतल देवी ने पैरा एशियन गेम्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए देश का मान बढ़ाया है। जापान के आइची-नागोया में आयोजित प्रतियोगिता के महिला कंपाउंड क्वालिफिकेशन राउंड में शीतल ने 720 में से 704 अंक हासिल किए। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने विश्व रिकॉर्ड की बराबरी की और 698 अंकों के एशियाई रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।

शीतल के इस दमदार प्रदर्शन से भारतीय खेमे में पदक की उम्मीदें बढ़ गई हैं। क्वालिफिकेशन राउंड में शानदार स्कोर के बाद उन्होंने नॉकआउट मुकाबलों के लिए अपनी स्थिति मजबूत कर ली है।

विश्व रिकॉर्ड की बराबरी कर सुर्खियों में आईं शीतल

महिला कंपाउंड स्पर्धा में शीतल देवी ने शुरुआत से ही सटीक निशाने लगाए। 704 अंकों का स्कोर उनकी मेहनत, एकाग्रता और निरंतरता का प्रमाण है। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने अंतरराष्ट्रीय पैरा तीरंदाजी में भारत की मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है।

पायल नाग ने भी किया शानदार प्रदर्शन

इस स्पर्धा में भारत की दूसरी तीरंदाज पायल नाग ने भी बेहतरीन प्रदर्शन किया। उन्होंने 675 अंक हासिल कर संयुक्त रूप से पांचवां स्थान प्राप्त किया। पायल के प्रदर्शन से भारतीय टीम की पदक उम्मीदों को और मजबूती मिली है।

पायल पहले भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा साबित कर चुकी हैं। 2026 में बैंकॉक में आयोजित वर्ल्ड आर्चरी पैरा सीरीज में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने अपनी क्षमता का परिचय दिया था।

पहले भी देश को गौरवान्वित कर चुकी हैं शीतल

शीतल देवी का सफर प्रेरणादायक रहा है। उन्होंने हांगझोऊ में आयोजित 2023 एशियन पैरा गेम्स में स्वर्ण पदक और पेरिस पैरालंपिक 2024 में कांस्य पदक जीतकर अपनी पहचान बनाई थी। उनकी उपलब्धियों ने देश के लाखों लोगों को प्रेरित किया है।

अब नॉकआउट मुकाबलों पर नजर

क्वालिफिकेशन राउंड में शानदार स्कोर के बाद अब शीतल देवी और पायल नाग की निगाहें अगले मुकाबलों पर हैं। भारतीय खेल प्रेमियों को उम्मीद है कि दोनों खिलाड़ी अपने प्रदर्शन को बरकरार रखते हुए पदक जीतने में सफल होंगी।

शीतल और पायल का प्रदर्शन भारतीय पैरा खेलों की बढ़ती ताकत को दर्शाता है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि ये दोनों तीरंदाज आगे के मुकाबलों में कैसा प्रदर्शन करती हैं और भारत के पदक अभियान को कितनी ऊंचाई तक पहुंचाती हैं।

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