कटिहार में 50 क्विंटल प्रतिबंधित मांगुर मछली जब्त, दो ट्रकों से बरामद हुई बड़ी खेप

कटिहार। बिहार के कटिहार जिले में मत्स्य विभाग की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रतिबंधित मांगुर मछली की भारी खेप पकड़ी है। दो ट्रकों में लदी करीब 50 क्विंटल मछली बरामद की गई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह खेप पश्चिम बंगाल से बिहार के पूर्णिया ले जाई जा रही थी।
जांच के दौरान ट्रकों को रोककर तलाशी ली गई, जिसमें बड़ी मात्रा में थाई/चाइनीज मांगुर मछली मिली। कार्रवाई के बाद विभाग ने तीन लोगों को डिटेन कर पूछताछ शुरू कर दी है। अधिकारियों की जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाने पर है कि मछली कहां से लाई गई थी और पूर्णिया में इसे किसके पास पहुंचाया जाना था।
कागजात की भी हो रही जांच
मत्स्य विभाग की टीम मछली की खेप से संबंधित दस्तावेजों और परिवहन से जुड़े कागजात की जांच कर रही है। इतनी बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित मछली मिलने के बाद विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया है। जांच के दौरान इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और खेप के स्रोत की जानकारी जुटाई जा रही है।
स्थानीय स्तर पर प्रतिबंधित मछली के कारोबार को लेकर कई तरह के दावे भी सामने आए हैं, लेकिन पुलिस या संबंधित विभाग की ओर से इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट होगी।
आखिर मांगुर मछली पर क्यों है रोक?
भारत में अफ्रीकी कैटफिश, जिसे कई जगह थाई या चाइनीज मांगुर के नाम से भी जाना जाता है, के पालन और आयात पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसकी प्रमुख वजह पर्यावरण और देशी मछलियों की प्रजातियों पर इसका संभावित असर है।
यह मछली तेजी से बढ़ती है और पानी में उपलब्ध छोटी मछलियों तथा अन्य जलीय जीवों को खा सकती है। इससे स्थानीय मछलियों की संख्या और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित होने की आशंका रहती है।
इसके अलावा, इस प्रजाति को प्रदूषित पानी में भी जीवित रहने में सक्षम माना जाता है। इसी वजह से इसके अवैध पालन और कारोबार को लेकर समय-समय पर कार्रवाई होती रही है।
खाने को लेकर क्या है खतरा?
मांगुर मछली को लेकर स्वास्थ्य संबंधी कई दावे भी सामने आते रहे हैं, खासकर तब जब इसे दूषित पानी या अस्वच्छ परिस्थितियों में पाला जाता है। हालांकि यह कहना कि मांगुर मछली खाने से सीधे कैंसर होता है, सामान्य रूप से स्थापित तथ्य नहीं है। जोखिम मछली की प्रजाति, पालन की परिस्थितियों और उसमें मौजूद प्रदूषकों पर निर्भर करता है।
कटिहार में पकड़ी गई करीब 50 क्विंटल मछली के मामले में अब विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि इसे किस स्रोत से लाया गया था और आगे कहां भेजा जाना था।



