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बंगाल में बड़ा सियासी घमासान: अकेली पड़ीं ममता, SIR पर ‘इंडिया’ गठबंधन में दरार

बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर एकजुट दिखने वाला ‘इंडिया’ गठबंधन पश्चिम बंगाल में बिखरता हुआ बिल्कुल अलग-अलग नजर आ रहा है। जहां तृणमूल कांग्रेस (TMC) इस मुद्दे पर खुलकर मैदान में है, वहीं कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियां सतर्क रुख अपना रही हैं। 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले SIR का यह मुद्दा बंगाल की राजनीति में बड़ा भूचाल मचा ला सकता है। जिससे विपक्षी एकता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस समय SIR को लेकर ममता बनर्जी की पार्टी खुद को अलग-थलग महसूस कर पा रही है।

पश्चिम बंगाल में 2026 के मध्य में विधानसभा चुनाव होने हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 2011 से लगातार सत्ता में हैं। हालांकि कांग्रेस, लेफ्ट और टीएमसी राष्ट्रीय स्तर पर ‘इंडिया’ गठबंधन का हिस्सा हैं, लेकिन राज्य में कांग्रेस विपक्ष की भूमिका निभाती रही है। ममता बनर्जी भी बंगाल में अपने दम पर ही चुनाव लड़ती आई हैं। इसी सियासी मजबूरी के चलते कांग्रेस इस मुद्दे पर फूंक-फूंककर कदम रख रही है और बीच का रास्ता अपनाती दिख रही है।

टीएमसी ने बताया ‘साजिश’, कांग्रेस का सिर्फ ‘तरीके’ पर विरोध

तृणमूल कांग्रेस ने एसआईआर को एक पूर्व नियोजित साजिश करार दिया है। पार्टी का आरोप है कि इसके जरिए हजारों मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं। तृणमूल के प्रवक्ता कुणाल घोष ने कोलकाता में दावा किया कि पार्टी ने 2002 की मतदाता सूची और हाल ही में चुनाव आयोग की वेबसाइट पर अपलोड की गई सूची के बीच गंभीर अनियमितताएं पाई हैं। टीएमसी और भाजपा इस मुद्दे पर आमने-सामने है और इसे एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी में है।

दूसरी तरफ, कांग्रेस पूरी तरह SIR के खिलाफ नहीं है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार कहते हैं कि हम तृणमूल की तरह SIR का नहीं, बल्कि इस प्रक्रिया के वक्त और तरीके का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में कुछ ही महीने बाकी हैं, ऐसे में इतनी बड़ी प्रक्रिया के लिए वक्त बहुत कम है। सरकार ने बिहार का उदाहरण देते हुए कहा कि यह प्रक्रिया बेहद दोषपूर्ण है और लोगों को मताधिकार से वंचित करने वाली है। कांग्रेस ने आयोग को कुछ सुझाव दिए थे, जिन्हें नहीं माना गया, इसलिए पार्टी प्रक्रिया का विरोध कर रही है।

राजनीतिक रणनीति या मजबूरी?

बंगाल में कांग्रेस न तो तृणमूल के साथ खड़ी दिखना चाहती है और न ही एसआईआर का खुला विरोध करके कोई मौका गंवाना चाहती है। पार्टी रणनीतिकार मानते हैं कि बिहार में एसआईआर के खिलाफ तृणमूल ‘इंडिया’ गठबंधन के साथ खड़ी थी, लेकिन बंगाल में स्थिति अलग है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 12 राज्यों में चल रही एसआईआर की यह प्रक्रिया संसद के शीतकालीन सत्र में एक बड़ा मुद्दा बन सकती है, लेकिन बंगाल में गठबंधन की यह दरार विपक्ष की रणनीति को कमजोर कर सकती है।

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