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U-864 पनडुब्बी: 81 साल बाद भी समुद्र में जहर का खतरा

नॉर्वे के फेडजे द्वीप के पास समुद्र की करीब 150 मीटर गहराई में जर्मन पनडुब्बी U-864 का मलबा आज भी पड़ा है। यह पनडुब्बी 9 फरवरी 1945 को ब्रिटिश पनडुब्बी HMS Venturer के हमले में डूब गई थी। इसमें सवार सभी 73 लोगों की मौत हो गई थी।

U-864 को 2003 में खोजा गया था। जांच में पता चला कि पनडुब्बी के अंदर बड़ी मात्रा में पारा (Mercury) था, जिसे द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापान भेजा जा रहा था। पनडुब्बी के टूटने के बाद पारे से भरे कंटेनर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं और समुद्र की तलछट में इसके प्रदूषण की चिंता बनी हुई है।

2026 में नॉर्वे के अधिकारियों ने मलबे से 22 कंटेनर निकालकर स्थिति का परीक्षण किया। इनमें से बड़ी संख्या में कंटेनर क्षतिग्रस्त पाए गए और कुछ से पारा रिसने की समस्या सामने आई। इस परीक्षण ने यह चिंता बढ़ा दी कि बड़े पैमाने पर पारा और पनडुब्बी को निकालने की कोशिश कहीं समुद्री पर्यावरण को और नुकसान न पहुंचा दे।

इसी वजह से नॉर्वे के सामने अब बड़ा सवाल है—क्या U-864 के मलबे और पारे को समुद्र से बाहर निकाला जाए या उसे वहीं सुरक्षित तरीके से ढककर सील कर दिया जाए? मलबे को वहीं छोड़ने की स्थिति में भी लंबे समय तक निगरानी करनी होगी, ताकि पारा समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र में न फैले।

फिलहाल इस मामले में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि प्रदूषण को हटाने की कोशिश खुद कहीं नए प्रदूषण का कारण न बन जाए। नॉर्वे को पर्यावरणीय जोखिम, तकनीकी कठिनाइयों और लंबे समय की निगरानी—तीनों को ध्यान में रखकर अंतिम फैसला करना होगा।

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