बिना डॉक्टर की पर्ची नहीं मिलेंगी ये 4 दवाएं! केंद्र सरकार लगाने जा रही सख्त पाबंदी

नई दिल्ली। देश में बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयां खरीदने और उनका इस्तेमाल करने के बढ़ते चलन पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार सख्त कदम उठाने की तैयारी में है। सरकार चार ऐसी दवाओं की बिक्री पर नए प्रतिबंध लगाने जा रही है, जिनका इस्तेमाल नींद की समस्या, मानसिक बीमारियों, नसों के दर्द और मांसपेशियों के दर्द के इलाज में किया जाता है। इनमें फ्लूपेंरिक्सोल, जोपिक्लोन, गैबापेंटिन और कैरिसोप्रोडोल शामिल हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने इन चारों दवाओं को ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स रूल्स की अनुसूची एच1 में शामिल करने का प्रस्ताव तैयार किया है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद इन दवाओं की बिक्री केवल डॉक्टर की पर्ची पर ही की जा सकेगी। इसके साथ ही मेडिकल स्टोर संचालकों को इनकी बिक्री का पूरा रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा।

इन चार दवाओं पर रहेगी सरकार की नजर
फ्लूपेंरिक्सोल: इसका इस्तेमाल मानसिक बीमारियों और सिजोफ्रेनिया जैसी समस्याओं के इलाज में किया जाता है।
जोपिक्लोन: नींद न आने की गंभीर समस्या में डॉक्टर इसे सीमित अवधि के लिए देते हैं।
गैबापेंटिन: यह दवा मिर्गी के इलाज और नसों से जुड़े दर्द को नियंत्रित करने में इस्तेमाल होती है।
कैरिसोप्रोडोल: मांसपेशियों में खिंचाव और दर्द से राहत देने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है।
मेडिकल स्टोर वालों को रखना होगा पूरा रिकॉर्ड
नए प्रस्ताव के तहत दवा विक्रेताओं को इन दवाओं की बिक्री का विस्तृत रिकॉर्ड रखना होगा। इसमें दवा खरीदने वाले मरीज का विवरण, डॉक्टर का नाम, पर्चे की जानकारी और बेची गई दवा की मात्रा दर्ज करनी होगी। इसका उद्देश्य दवाओं की अनियंत्रित बिक्री और गलत इस्तेमाल पर निगरानी बढ़ाना है।
गलत इस्तेमाल और नशे की आशंका बनी वजह
विशेषज्ञों के सामने इन दवाओं के दुरुपयोग और नशे के लिए इस्तेमाल किए जाने की चिंताएं भी सामने आई हैं। चूंकि इन दवाओं का असर केंद्रीय तंत्रिका तंत्र पर पड़ता है, इसलिए बिना चिकित्सकीय निगरानी के इनका सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
सरकार का मुख्य उद्देश्य लोगों को खुद से दवा लेने की आदत से बचाना और दवाओं की बिक्री को अधिक नियंत्रित करना है। हालांकि प्रस्ताव को मंजूरी मिलने तक मौजूदा नियमों में बदलाव लागू नहीं माना जाएगा।



