1979 का वो खौफनाक दिन, जब हथियारबंद लोगों ने मक्का की ग्रैंड मस्जिद पर किया कब्जा

मक्का की ग्रैंड मस्जिद दुनिया के सबसे पवित्र इस्लामिक स्थलों में शामिल है। इसलिए जब नवंबर 1979 में हथियारबंद लोगों के एक समूह ने इस परिसर पर कब्जा कर लिया, तो यह घटना सिर्फ सऊदी अरब ही नहीं बल्कि पूरी मुस्लिम दुनिया के लिए बड़ा संकट बन गई थी।
20 नवंबर 1979 को जुहैमान अल-उतैबी के नेतृत्व में सैकड़ों हथियारबंद लोग ग्रैंड मस्जिद में दाखिल हुए। उन्होंने परिसर के कई हिस्सों पर नियंत्रण कर लिया और वहां मौजूद लोगों को बंधक बना लिया। जुहैमान और उसके समर्थक सऊदी शासन की धार्मिक और राजनीतिक नीतियों के विरोध में थे।
विद्रोहियों ने अपने आंदोलन को धार्मिक आधार देने की कोशिश की। जुहैमान ने अपने रिश्तेदार मोहम्मद अब्दुल्लाह अल-कहतानी को महदी घोषित किया और लोगों से उनके प्रति निष्ठा जताने की अपील की। इस दावे के बाद मस्जिद के भीतर मौजूद स्थिति और भी गंभीर हो गई।
सऊदी सुरक्षा बलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती मस्जिद को खाली कराना थी। सामान्य सैन्य कार्रवाई यहां बेहद जोखिम भरी थी, क्योंकि परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। शुरुआती प्रयासों में सुरक्षा बलों को विद्रोहियों की भारी गोलीबारी का सामना करना पड़ा।
इसके बाद अभियान कई दिनों तक चलता रहा। विद्रोहियों ने मस्जिद के भूमिगत हिस्सों और तहखानों में भी मोर्चा बना लिया था। सुरक्षा बलों को एक-एक हिस्से पर नियंत्रण हासिल करना पड़ा। आखिरकार दिसंबर की शुरुआत में विद्रोहियों के आखिरी ठिकानों पर भी कब्जा कर लिया गया और करीब दो सप्ताह से चला आ रहा संकट समाप्त हुआ।
विद्रोह के बाद जुहैमान और उसके साथियों को गिरफ्तार किया गया। जनवरी 1980 में जुहैमान समेत 63 लोगों को फांसी दी गई। इस घटना में विद्रोहियों के अलावा सुरक्षा बलों और आम लोगों की भी जान गई।
इस घटना ने सऊदी अरब को कैसे प्रभावित किया?
मक्का की घटना ने सऊदी नेतृत्व को धार्मिक और राजनीतिक व्यवस्था पर फिर से विचार करने के लिए मजबूर किया। इसके बाद देश में धार्मिक रूढ़िवाद और सामाजिक नियंत्रण को और मजबूती मिली। 1979 की घटना को बाद के दशकों में सऊदी अरब और क्षेत्र की धार्मिक-राजनीतिक परिस्थितियों को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जाता है।
इसी दौर में ईरान में इस्लामी क्रांति भी हुई थी। दोनों घटनाओं ने पश्चिम एशिया की राजनीति और सऊदी अरब-ईरान के बीच बढ़ती वैचारिक प्रतिस्पर्धा के माहौल को प्रभावित किया।
मक्का की 1979 की घटना इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि यह दिखाती है कि धार्मिक स्थलों से जुड़ा कोई सुरक्षा संकट कितना व्यापक राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव पैदा कर सकता है। आज भी इस घटना को आधुनिक सऊदी इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील अध्यायों में गिना जाता है।



