NEET के खिलाफ तमिलनाडु का फिर बड़ा ऐलान, 12वीं के अंकों से मेडिकल एडमिशन कराने की मांग

तमिलनाडु सरकार ने एक बार फिर राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) को लेकर अपना विरोध जाहिर किया है। मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य सरकार मेडिकल समेत अन्य पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए नीट और दूसरी केंद्रीकृत प्रवेश परीक्षाओं के पक्ष में नहीं है। सरकार चाहती है कि मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश का आधार 12वीं कक्षा के परीक्षा परिणामों को बनाया जाए।
इस संबंध में बुधवार को चेन्नई स्थित सचिवालय में एक अहम बैठक हुई। हाई-पावर्ड टास्क फोर्स के अध्यक्ष नंदन नीलेकणि ने अपनी टीम के सदस्यों के साथ मुख्यमंत्री से मुलाकात की। बैठक में आईआईटी मद्रास के निदेशक वी कामकोटि, पूर्व केंद्रीय शिक्षा सचिव अनीता करवाल और एकस्टेप फाउंडेशन के सीईओ शंकर मारुवाडा भी शामिल हुए।
टास्क फोर्स के सामने रखी गई दो टूक मांग
राज्य सरकार की ओर से जारी बयान के अनुसार, बैठक में तमिलनाडु ने अपनी पुरानी मांग दोहराते हुए कहा कि मेडिकल और अन्य पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए नीट जैसी परीक्षाओं को पूरी तरह समाप्त किया जाना चाहिए। इसके स्थान पर छात्रों के कक्षा 12वीं के अंकों को दाखिले का आधार बनाया जाए।
सरकार का मानना है कि बोर्ड परीक्षा में छात्रों के प्रदर्शन को महत्व देने से सभी को समान अवसर मिलेंगे और प्रवेश प्रक्रिया में क्षेत्रीय असमानताओं को कम किया जा सकेगा।
विधानसभा में भी नीट के खिलाफ एकजुट हुआ तमिलनाडु
नीट के विरोध में तमिलनाडु विधानसभा पहले ही अपना रुख स्पष्ट कर चुकी है। 11 अगस्त को विधानसभा ने इस परीक्षा के खिलाफ सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया था। अब मुख्यमंत्री ने टास्क फोर्स के सामने भी राज्य का यही पक्ष रखा है।
इससे साफ है कि तमिलनाडु सरकार इस मुद्दे को केवल राजनीतिक विरोध तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि देश की परीक्षा व्यवस्था में बदलाव की मांग के रूप में सामने रख रही है।
परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए गठित हुई टास्क फोर्स
केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के उद्देश्य से नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में हाई-पावर्ड टास्क फोर्स का गठन किया था। यह फैसला राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षाओं की विश्वसनीयता और पारदर्शिता को लेकर उठे सवालों के बाद लिया गया।
टास्क फोर्स को परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा, प्रश्नपत्रों की गोपनीयता, छात्रों की परीक्षा तक पहुंच, तकनीकी ढांचे और विद्यार्थियों की मानसिक सेहत जैसे पहलुओं की समीक्षा की जिम्मेदारी दी गई है। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली भी इसकी जांच के दायरे में है।
NTA को खत्म करने की भी उठ चुकी है मांग
तमिलनाडु में नीट के विरोध की आवाज केवल सरकार तक सीमित नहीं है। स्टेट प्लेटफॉर्म फॉर कॉमन स्कूल सिस्टम-तमिलनाडु ने भी टास्क फोर्स के सामने अपनी आपत्तियां रखी थीं।
संगठन ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को समाप्त करने और स्नातक स्तर पर होने वाली केंद्रीकृत प्रवेश परीक्षाओं को बंद करने की मांग की थी। उसका तर्क है कि मेडिकल दाखिले के लिए नीट को अनिवार्य बनाने से छात्रों के सामने विकल्प सीमित हो गए हैं।
12वीं के अंकों को बेहतर विकल्प मानता है राज्य
तमिलनाडु में नीट लागू होने से पहले मेडिकल कॉलेजों में दाखिला 12वीं के अंकों के आधार पर दिया जाता था। राज्य सरकार और नीट विरोधी संगठनों का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में ग्रामीण क्षेत्रों और राज्य बोर्ड से पढ़ने वाले विद्यार्थियों को नुकसान उठाना पड़ता है।
उनका मानना है कि महंगी कोचिंग और राष्ट्रीय स्तर के पाठ्यक्रम तक बेहतर पहुंच रखने वाले छात्रों को प्रतियोगी परीक्षा में अतिरिक्त लाभ मिलता है। वहीं, आर्थिक रूप से कमजोर और छोटे शहरों के विद्यार्थियों के लिए मुकाबला कठिन हो जाता है।
तमिलनाडु सरकार का तर्क है कि किसी छात्र की 12 साल की शैक्षणिक मेहनत का मूल्यांकन एक ही प्रवेश परीक्षा के आधार पर नहीं होना चाहिए। अब देखना होगा कि परीक्षा सुधारों पर विचार कर रही केंद्र की टास्क फोर्स राज्य की इन सिफारिशों को अपनी रिपोर्ट में कितनी जगह देती है।



