नेपाल में बाढ़ से हाहाकार, 626 से ज्यादा शव बरामद; मोर्चरी फुल, 250 शवों के लिए बना अस्थायी केंद्र

काठमांडू। नेपाल में भीषण बाढ़ और फ्लैश फ्लड के बाद हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं। बाढ़ की चपेट में आकर जान गंवाने वाले लोगों के शव बड़ी संख्या में बरामद हो रहे हैं, जिसके चलते कई जिलों की मोर्चरी क्षमता पूरी तरह खत्म हो गई है। अब तक 626 से ज्यादा शव बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। शवों की पहचान और उन्हें सुरक्षित रखने के लिए प्रशासन को अतिरिक्त इंतजाम करने पड़ रहे हैं।
भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों के तेज बहाव में बहे लोगों के शव दर्जनों किलोमीटर दूर तक पहुंच रहे हैं। रसुवा और नुवाकोट से बहकर शव चितवन, तनहुं, नवलपरासी और पोखरा तक मिलने की जानकारी है। अस्पतालों में जगह नहीं बचने के कारण कई जिलों से शवों को पड़ोसी इलाकों में भेजा जा रहा है। इस बीच आपदा की आड़ में कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा नदी में बहकर आए शवों से गहने और कीमती सामान लूटने की खबरों ने त्रासदी को और गंभीर बना दिया है।
भरतपुर में 250 शवों के लिए अस्थायी मोर्चरी
चितवन में शवों की संख्या स्थानीय अस्पतालों की 30 से 50 शवों की क्षमता से काफी अधिक हो गई है। इसके बाद प्रशासन ने भरतपुर मेट्रोपॉलिटन सिटी-10 स्थित इंडस्ट्रियल एंटरप्राइज डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट की खाली इमारत को अस्थायी मोर्चरी में बदलने का फैसला किया है। यहां करीब 250 शवों को रखने की क्षमता होगी। शवों को सुरक्षित रखने के लिए एयर कंडीशनर और ड्राई आइस का इस्तेमाल किया जा रहा है।
भारत भेजेगा रेस्क्यू और मेडिकल टीम
नेपाल में राहत और बचाव अभियान के लिए भारत ने भी सहायता बढ़ाई है। भारत की ओर से राहत सामग्री की कई खेप नेपाल भेजी जा चुकी हैं। नेपाल के अनुरोध पर भारत टनल रेस्क्यू टीम भेजने की तैयारी कर रहा है। पहले एक रेकी टीम भेजकर हालात का आकलन किया जाएगा और आवश्यक उपकरणों की पहचान की जाएगी। इसके अलावा मेडिकल टीम भी नेपाल भेजी जा रही है।
अपनों की तलाश में अस्पतालों के चक्कर काट रहे परिजन
बाढ़ के बाद बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। काठमांडू के त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल समेत कई अस्पतालों में परिजन अपने लापता रिश्तेदारों की तलाश कर रहे हैं। रसुवा, नुवाकोट और गोरखा से सैकड़ों लोग चितवन और आसपास के इलाकों में पहुंचकर मृतकों और सुरक्षित बचे लोगों की सूची में अपनों का नाम तलाश रहे हैं। प्रशासन के सामने राहत और बचाव के साथ-साथ शवों की पहचान और परिजनों तक उन्हें पहुंचाना भी बड़ी चुनौती बन गया है।



