बालेन शाह और मोदी सरकार का बड़ा फैसला, भारत-नेपाल के बीच शुरू हुई डिजिटल पेमेंट सर्विस, नोट बदलने का झंझट खत्म

नई दिल्ली: नेपाल की बालेन शाह और भारत की मोदी सरकार के बीच दोनों करेंसी एक्सचेंज को लेकर बड़ा फैसला हुआ है। दोनों देश के नागरिक अब एक-दूसरे देश में बिना किसी रुकावट के डिजिटल ट्रांजेक्शन कर सकेंगे। दोनों देशों ने UPI-NPI क्रॉस-बॉर्डर रेमिटेंस मैकेनिज्म को आधिकारिक तौर पर शुरू कर दिया गया है।
भारत के यूपीआई (UPI) और नेपाल के एनपीआई (NPI) के सीधे जुड़ने से अब दोनों देशों के आम नागरिकों, प्रवासियों और व्यापारियों के लिए पैसे का लेन-देन बेहद आसान हो गया है। यह सिस्टम 6 जून 2026 को आधिकारिक तौर पर चालू किया गया है। अब दोनों देशों के नागरिक मोबाइल बैंकिंग ऐप और डिजिटल वॉलेट के जरिए रियल-टाइम, सुरक्षित और तत्काल पैसों का ट्रांजेक्शन कर सकेंगे।
क्या होंगे लोगों को फायदे?
घर पैसे भेजना हुआ आसान
- भारत में काम करने वाले नेपाली नागरिक और नेपाल में काम करने वाले भारतीय नागरिक अब बिना किसी झंझट के सीधे अपने मोबाइल बैंकिंग ऐप या डिजिटल वॉलेट से अपने घर पैसे ट्रांसफर कर सकते हैं।
- इसके लिए अब किसी मनी ट्रांसफर एजेंसी के चक्कर काटने की जरूरत नहीं होगी।
अकाउंट डिटेल शेयर करने की जरूरत नहीं
- पैसे भेजने के लिए अब बैंक खाता संख्या या आईएफएससी (IFSC) कोड जैसी संवेदनशील जानकारियां साझा करने की जरूरत नहीं है।
- सिर्फ मोबाइल नंबर, UPI ID या वर्चुअल पेमेंट एड्रेस (VPA) के जरिए पलक झपकते ही सुरक्षित तरीके से पैसा ट्रांसफर हो जाएगा।
कैश ले जाने की जरूरत नहीं
- भारत और नेपाल की सीमा खुली होने के कारण लोग अक्सर बड़ी मात्रा में नकद लेकर यात्रा करते थे, जिससे चोरी या गुम होने का डर रहता था।
- अब डिजिटल ट्रांसफर से यह जोखिम पूरी तरह खत्म हो जाएगा।
कम लागत और पारदर्शी व्यवस्था
- पारंपरिक तरीकों से पैसे भेजने पर ज्यादा सर्विस चार्ज लगता था।
- यूपीआई के जरिए पैसे भेजना बहुत सस्ता और पूरी तरह से पारदर्शी होगा, जिससे मेहनत की कमाई का एक-एक पैसा सुरक्षित घर पहुंचेगा।
पर्यटकों और स्थानीय दुकानदारों को भी फायदा
- अगर आप आप नेपाल घूमने जा रहे हैं या वहां के स्थानीय व्यापारी हैं, तो यह सिस्टम आपके लिए बहुत फायदेमंद है।
- अब भारत और नेपाल के बीच यात्रा करने वाले लोगों को बड़ी मात्रा में नकदी रखने या करेंसी एक्सचेंज की जटिल प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा।



