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‘वोट चोरी’ के खिलाफ ‘INDIA’ गठबंधन का हल्लाबोल: 1 नवंबर की दिल्ली रैली से पहले खड़गे की अध्यक्षता में बनी बड़ी रणनीति

विपक्ष का INDIA गठबंधन इन दिनों ‘वोट चोरी’ के गंभीर आरोपों और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आक्रामक तेवर अपनाए हुए है। इस सिलसिले में विपक्षी नेताओं की एक महत्वपूर्ण वर्चुअल बैठक बुलाई गई है, जिसकी अध्यक्षता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे कर रहे हैं। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी विरोध प्रदर्शनों की रूपरेखा तय करना और 1 नवंबर को दिल्ली में होने वाली ‘INDIA’ गठबंधन की प्रस्तावित रैली की तैयारियों की अंतिम समीक्षा करना है। इससे पहले 13 अक्टूबर को पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने आवास पर विपक्षी नेताओं को चाय पर आमंत्रित किया था, जिसमें इस लड़ाई को तार्किक अंजाम तक ले जाने का संकल्प लिया गया था। विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट तक मार्च भी कर चुके हैं।

इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम के केंद्र में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कड़े बयान हैं। खड़गे ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए 2023 के उस कानून को तुरंत रद्द करने की मांग की है, जो चुनाव आयुक्तों को उनके आधिकारिक कर्तव्यों के दौरान किए गए कार्यों के लिए दीवानी और आपराधिक मुकदमों से कानूनी सुरक्षा (इम्युनिटी) प्रदान करता है। उनका आरोप है कि ‘मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023’ के जरिए सरकार चुनाव आयुक्तों को जवाबदेही से बचा रही है।

इसके साथ ही, खड़गे ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग के केंद्रीय कार्यालय से विशेष सॉफ्टवेयर के माध्यम से बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) को मतदाता सूची में फेरबदल करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि विपक्ष किसी खास पार्टी या व्यक्ति की जीत के लिए नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संस्थागत विश्वसनीयता की रक्षा के लिए लड़ रहा है। निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने मांग की है कि भविष्य के चुनाव इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) के बजाय पुराने पेपर बैलेट के जरिए कराए जाएं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाया जाए।

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