दिल्ली में प्रदूषण का कहर! GRAP-2 लागू, निर्माण कार्यों से लेकर डीजल जनरेटर तक पर सख्ती, जानें नए नियम

राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण लगातार गंभीर होता जा रहा है। नवंबर की शुरुआत के साथ ही हवा की गुणवत्ता तेजी से बिगड़ने लगी है। हालात ऐसे हैं कि कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) गंभीर श्रेणी तक पहुंच गया है। प्रदूषण पर काबू पाने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने दिल्ली-NCR में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान यानी GRAP-2 लागू कर दिया है।
इसके लागू होने के बाद GRAP-1 के तहत जारी पाबंदियां भी जारी रहेंगी। साथ ही प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों, निर्माण गतिविधियों, औद्योगिक इकाइयों और डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर निगरानी और सख्ती बढ़ाई जाएगी।
दिल्ली के कई इलाकों में AQI 400 के पार
सोमवार को दिल्ली में सुबह से ही धुंध और स्मॉग की मोटी परत देखने को मिली। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक, सुबह 9 बजे राजधानी का AQI 312 दर्ज किया गया था। वहीं शाम 4 बजे तक जहांगीरपुरी में AQI 436 पहुंच गया।
इसके अलावा रोहिणी में 415 और पंजाबी बाग में 413 AQI रिकॉर्ड किया गया। इन इलाकों में हवा की गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में पहुंच गई। शहर का औसत AQI भी 324 दर्ज किया गया, जो इस साल 4 फरवरी के बाद सबसे अधिक स्तर बताया गया है।
निर्माण कार्यों पर बढ़ेगी सख्ती
GRAP-2 लागू होने के बाद निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाली धूल को नियंत्रित करने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।
- 500 वर्ग मीटर या उससे अधिक क्षेत्रफल वाले ऐसे निर्माण स्थलों पर रोक रहेगी, जो सरकारी पोर्टल पर पंजीकृत नहीं हैं।
- निर्माण सामग्री और मलबे को खुले में रखने की अनुमति नहीं होगी।
- निर्माण सामग्री को ढककर ही एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाना होगा।
- निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाले कचरे का उचित निस्तारण करना अनिवार्य होगा।
खुले में कचरा जलाने पर पूरी तरह रोक
प्रदूषण बढ़ाने वाले प्रमुख कारणों में खुले में कचरा और जैविक सामग्री जलाना भी शामिल है। इसे रोकने के लिए प्रशासन की निगरानी बढ़ाई जाएगी।
- पत्तियां, लकड़ी, बायोमास और नगर निगम का कचरा खुले में नहीं जलाया जा सकेगा।
- लैंडफिल और डंपिंग साइट पर कचरा जलाने पर प्रतिबंध रहेगा।
- नियम तोड़ने वालों पर पर्यावरणीय मुआवजा और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर कार्रवाई
दिल्ली की सड़कों पर चलने वाले प्रदूषणकारी वाहनों पर भी प्रशासन की नजर रहेगी। वाहन चालकों को वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) रखना होगा।
- PUC नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर कार्रवाई होगी।
- ज्यादा धुआं छोड़ने वाले वाहनों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।
- पुराने पेट्रोल और डीजल वाहनों पर लागू प्रतिबंधों का पालन कराना अनिवार्य होगा।
फैक्ट्रियों और उद्योगों पर भी शिकंजा
औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले धुएं और प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए निरीक्षण बढ़ाया जाएगा। प्रदूषण मानकों का उल्लंघन करने वाली फैक्ट्रियों पर कार्रवाई होगी।
बिना अनुमति संचालित औद्योगिक इकाइयों को भी बख्शा नहीं जाएगा। ईंट भट्ठों, हॉट मिक्स प्लांट और थर्मल पावर प्लांट को निर्धारित ईंधन और उत्सर्जन मानकों का पालन करना होगा।
डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर प्रतिबंध
GRAP-2 के तहत डीजल जनरेटर के इस्तेमाल को लेकर भी सख्ती की गई है। सामान्य परिस्थितियों में डीजल जनरेटर को बिजली के नियमित स्रोत के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। निर्धारित नियमों और छूट के दायरे के अनुसार ही इनका संचालन किया जा सकेगा।
क्या है GRAP-2 लागू करने का मकसद?
GRAP-2 का मुख्य उद्देश्य प्रदूषण को और गंभीर स्थिति में पहुंचने से रोकना है। इसके तहत धूल नियंत्रण, सड़कों की सफाई, पानी का छिड़काव, निर्माण स्थलों की निगरानी और प्रदूषणकारी गतिविधियों पर रोक जैसे कदम उठाए जाते हैं।
दिल्ली-NCR में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए लोगों को भी सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को खराब हवा में बाहर निकलने से बचना चाहिए।



