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Cyclone Murasu: बंगाल की खाड़ी में ही क्यों बनते हैं सबसे ज्यादा चक्रवात? जानिए वजह

बंगाल की खाड़ी में एक बार फिर मौसम ने करवट ली है। चक्रवाती तूफान मुरासु (Murasu) के सक्रिय होने के साथ ही आंध्र प्रदेश और आसपास के तटीय इलाकों में मौसम को लेकर चिंता बढ़ गई है। तेज हवाओं और भारी बारिश की आशंका के बीच मौसम विभाग ने संबंधित क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाने की सलाह दी है।

लगातार कम अंतराल में चक्रवाती गतिविधियां सामने आने से एक सवाल फिर चर्चा में है—आखिर बंगाल की खाड़ी चक्रवातों के लिए इतनी अनुकूल क्यों है? और ये समुद्री तूफान बनते कैसे हैं?

सबसे पहले समझिए, चक्रवात बनता कैसे है?

चक्रवात की शुरुआत समुद्र के ऊपर बनने वाले कम दबाव वाले क्षेत्र से होती है। जब समुद्र की सतह का पानी पर्याप्त गर्म होता है, तो उससे बड़ी मात्रा में नमी वायुमंडल में पहुंचती है। गर्म और नम हवा ऊपर उठती है और उसके आसपास की हवा कम दबाव वाले क्षेत्र की ओर आने लगती है।

ऊपर पहुंची नम हवा ठंडी होकर बादलों में बदलती है और इस प्रक्रिया में गर्मी निकलती है। यह गर्मी सिस्टम को और ऊर्जा देती है। जैसे-जैसे कम दबाव मजबूत होता जाता है, हवाएं तेजी से घूमने लगती हैं और धीरे-धीरे यह सिस्टम डिप्रेशन, डीप डिप्रेशन और फिर चक्रवाती तूफान का रूप ले सकता है।

आमतौर पर उष्णकटिबंधीय चक्रवात के विकास के लिए समुद्र की सतह का तापमान करीब 26.5 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक होना अनुकूल माना जाता है।

हवा की दिशा भी तय करती है तूफान की ताकत

सिर्फ गर्म समुद्र होना ही पर्याप्त नहीं है। चक्रवात के मजबूत होने के लिए वातावरण में विंड शियर यानी अलग-अलग ऊंचाई पर हवाओं की गति और दिशा में बहुत ज्यादा अंतर नहीं होना चाहिए।

अगर ऊपरी स्तर की हवाएं बहुत तेज हों या उनकी दिशा समुद्र की सतह के पास चल रही हवाओं से काफी अलग हो, तो चक्रवात का ढांचा बिगड़ सकता है। इसके उलट कम विंड शियर तूफान को संगठित होकर मजबूत होने का मौका देता है।

बंगाल की खाड़ी में ज्यादा चक्रवात क्यों आते हैं?

भारत के पूर्वी तट से लगे बंगाल की खाड़ी को दुनिया के प्रमुख चक्रवात-प्रवण क्षेत्रों में गिना जाता है। इसके पीछे कई भौगोलिक और समुद्री कारण हैं।

पहला कारण है गर्म समुद्री पानी। बंगाल की खाड़ी का पानी चक्रवातों के लिए जरूरी ऊर्जा उपलब्ध करा सकता है।

दूसरा कारण है मौसम संबंधी लहरें। उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पूर्व से पश्चिम की ओर बढ़ने वाली मौसमी हवाओं की लहरें कई बार कम दबाव वाले सिस्टम को जन्म देती हैं, जो अनुकूल परिस्थितियों में चक्रवात में बदल सकते हैं।

तीसरा कारण है आसपास के समुद्री क्षेत्रों से मिलने वाली नमी। बंगाल की खाड़ी में बड़ी मात्रा में नमी उपलब्ध रहती है, जो विकसित हो रहे मौसम तंत्र को अतिरिक्त ऊर्जा प्रदान कर सकती है।

अक्टूबर-नवंबर में क्यों बढ़ जाता है चक्रवात का खतरा?

मानसून के बाद अक्टूबर और नवंबर का समय बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती गतिविधियों के लिए काफी अनुकूल हो जाता है।

मानसून के दौरान वातावरण में तेज ऊर्ध्वाधर हवाओं का अंतर कई बार तूफानी सिस्टम को मजबूत नहीं होने देता। लेकिन मानसून की वापसी के बाद परिस्थितियां बदलती हैं। समुद्र का पानी गर्म रहता है, वातावरण में पर्याप्त नमी मौजूद होती है और कई बार विंड शियर भी अपेक्षाकृत अनुकूल हो जाता है।

एक अन्य महत्वपूर्ण वजह बंगाल की खाड़ी में ताजे पानी की सतही परत भी है। भारी बारिश और नदियों से आने वाला पानी समुद्र की ऊपरी सतह पर कम खारे पानी की परत बना सकता है। यह परत समुद्र की गर्मी को ऊपरी हिस्से में बनाए रखने में योगदान देती है।

गर्म समुद्र तूफान को देता है लगातार ऊर्जा

जब चक्रवात समुद्र के ऊपर घूमता है तो उसकी तेज हवाएं समुद्र के नीचे मौजूद ठंडे पानी को ऊपर ला सकती हैं। इससे समुद्र की सतह ठंडी होने पर तूफान को मिलने वाली ऊर्जा कम हो सकती है।

लेकिन यदि गर्म पानी समुद्र की ऊपरी परत के नीचे भी पर्याप्त गहराई तक मौजूद हो, तो तूफान के गुजरने के दौरान समुद्र जल्दी ठंडा नहीं होता। इससे चक्रवात को लंबे समय तक ऊर्जा मिलती रह सकती है और उसकी तीव्रता बढ़ सकती है।

जलवायु परिवर्तन से बढ़ रही है चिंता

समुद्र के बढ़ते तापमान को लेकर वैज्ञानिक लंबे समय से चिंता जताते रहे हैं। गर्म समुद्र चक्रवातों को अधिक ऊर्जा उपलब्ध करा सकता है। हालांकि चक्रवातों की संख्या, उनकी तीव्रता और जलवायु परिवर्तन के बीच संबंध काफी जटिल है और हर क्षेत्र में इसका प्रभाव एक जैसा नहीं होता।

इसलिए बंगाल की खाड़ी से जुड़े तटीय राज्यों—विशेषकर आंध्र प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु—के लिए बेहतर पूर्वानुमान, समय पर चेतावनी और तटीय आपदा प्रबंधन बेहद महत्वपूर्ण है।

मुरासु ने फिर याद दिलाया समुद्र की ताकत

चक्रवात मुरासु जैसी घटनाएं यह बताती हैं कि समुद्र से उठने वाले तूफान कितनी तेजी से ताकत पकड़ सकते हैं। ऐसे में मौसम विभाग की चेतावनियों पर ध्यान देना, तटीय इलाकों में प्रशासन के निर्देशों का पालन करना और आपात स्थिति के लिए पहले से तैयार रहना ही सबसे सुरक्षित तरीका है।

बंगाल की खाड़ी में चक्रवात कोई अचानक होने वाली घटना नहीं है। गर्म समुद्र, नमी, कम दबाव और अनुकूल हवाओं का मेल जब एक साथ आता है, तो यही शांत दिखने वाला समुद्र बेहद शक्तिशाली तूफान को जन्म दे सकता है।

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