हमर छत्तीसगढ़

पुलिस के वॉकी-टॉकी हुए गूंगे-बहरे, रिटायर होने की स्थिति में; पुलिसकर्मियों को अफसरों का मैसेज पहुंचाने में परेशानी

बिलासपुर। बिलासपुर जिले की पुलिस 12 साल पुराने मेनपैक और ऐस्थेटिक वॉकी-टॉकी सेट का इस्तेमाल कर रही है। सेट पुराने होने के कारण बातचीत के दौरान आवाज साफ नहीं आती और कई जगह तो मेनपैक सेट पूरी तरह काम नहीं करते।

पुलिस विभाग अपने रेडियो सिस्टम के माध्यम से अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच कम्यूनिकेशन करती है, लेकिन बीते समय में तकनीकी खामियों की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। रेडियो स्टेशन में मौजूद टेक्निकल टीम पुराने सेट की मरम्मत कर काम चला रही है। सरगुजा और बिलासपुर रेंज के 14 जिलों में रेडियो कम्यूनिकेशन सिस्टम से जुड़ा काम बिलासपुर से नियंत्रित होता है।

बिलासपुर शहर में कई डार्क स्पॉट हैं, जैसे मुंगेली नाका, सिविल लाइन सीएसपी और एडिशनल एसपी कार्यालय, ऑफिसर मेस, जहां मेनपैक सेट काम नहीं करते। इन क्षेत्रों में ऐस्थेटिक सेट और जीपी एंटीना लगाकर कम्यूनिकेशन बेहतर किया जा रहा है।

नक्सल प्रभावित इलाकों में डिजिटल मेनपैक और ऐस्थेटिक सेट दिए गए हैं, लेकिन रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग जिलों में अभी भी एनालॉग सिस्टम का उपयोग हो रहा है।

पुलिस मुख्यालय ने पुराने सेट को सुधारने के साथ 70 प्रतिशत से अधिक वायरलेस सेट को रिप्लेस करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

डिजिटल सेट में आवाज साफ, उच्च एन्क्रिप्शन और जीपीएस, मैसेज, डेटा जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं, जबकि एनालॉग सेट पर केवल आवाज आधारित कम्यूनिकेशन संभव है।

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