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यूपी में दवाओं की कीमतों पर बड़ा फैसला, अब वेबसाइट पर दिखाना होगा खरीद और बिक्री रेट

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में दवाओं की कीमतों को लेकर पारदर्शिता बढ़ाने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने नया आदेश जारी किया है। अब राज्य की सभी खुदरा दवा दुकानों और अस्पताल परिसरों में संचालित फार्मेसियों को अपनी वेबसाइट पर दवाओं से जुड़ी पूरी कीमत और जरूरी जानकारी सार्वजनिक करनी होगी।

एफएसडीए आयुक्त डॉ. रोशन जैकब की ओर से जारी निर्देशों के मुताबिक, फार्मेसियों को दवा की खरीद दर और मरीज को बेची जाने वाली बिक्री दर स्पष्ट रूप से वेबसाइट पर उपलब्ध करानी होगी। इसका उद्देश्य दवाओं की कीमतों में पारदर्शिता लाना और मरीजों से मनमानी कीमत वसूले जाने की शिकायतों पर रोक लगाना है।

खरीद और बिक्री मूल्य बताना होगा

नए नियमों के तहत फार्मेसियों को निर्माता या आयातक से प्राप्त प्राइस लिस्ट सार्वजनिक करनी होगी। वेबसाइट पर दवा से संबंधित निर्माता का नाम, ब्रांड नेम, जेनेरिक नाम, खरीद मूल्य और बिक्री मूल्य जैसी जानकारी उपलब्ध करानी होगी।

अस्पताल परिसरों में संचालित फार्मेसियों को लेकर विशेष जोर दिया गया है। ऐसे स्थानों पर मरीजों और उनके परिजनों के पास कई बार दवाएं, मेडिकल उपकरण या न्यूट्रिशन प्रोडक्ट खरीदने के सीमित विकल्प होते हैं। ऐसे में कीमतों की जानकारी सार्वजनिक होने से उन्हें खरीद से पहले वास्तविक दर की जानकारी मिल सकेगी।

वेबसाइट पर फार्मेसी और फार्मासिस्ट की जानकारी भी होगी

एफएसडीए के निर्देशों के अनुसार फार्मेसी की वेबसाइट के होमपेज पर केवल दवाओं की कीमत ही नहीं, बल्कि संस्थान से जुड़ी जरूरी जानकारी भी उपलब्ध करानी होगी।

इसमें फार्मेसी का नाम, लाइसेंस नंबर, लाइसेंस धारक का नाम और पंजीकृत परिसर का पता शामिल होगा। साथ ही नियुक्त फार्मासिस्ट का नाम, रजिस्ट्रेशन नंबर और फोटो भी वेबसाइट पर प्रदर्शित करना होगा।

हर सप्ताह अपडेट करना होगा दवाओं का स्टॉक

नए प्रावधानों में दवाओं के स्टॉक को लेकर भी पारदर्शिता पर जोर दिया गया है। प्रत्येक फार्मेसी को अपने पास उपलब्ध दवाओं की जानकारी हर सप्ताह वेबसाइट पर अपडेट करनी होगी।

काउंटर पर QR कोड से मिलेगी पूरी जानकारी

मरीजों के लिए जानकारी तक पहुंच आसान बनाने के लिए फार्मेसी और अस्पताल के दवा काउंटर पर QR कोड या मोबाइल ऐप का लिंक प्रमुखता से प्रदर्शित करना होगा।

मरीज या उनके परिजन इस QR कोड को मोबाइल से स्कैन करके संबंधित फार्मेसी की वेबसाइट पर पहुंच सकेंगे। वहां वे दवा का खरीद मूल्य और बिक्री मूल्य देखकर खरीदारी से पहले कीमत की तुलना कर सकेंगे।

नकली और मिलावटी दवाओं पर भी निगरानी

एफएसडीए का मानना है कि खरीद मूल्य और बिक्री मूल्य के बीच असामान्य अंतर होने पर दवाओं की गुणवत्ता और उनकी वास्तविक कीमत को लेकर सवाल उठ सकते हैं। कीमतों को सार्वजनिक करने की व्यवस्था से संदिग्ध दवाओं, नकली या मिलावटी उत्पादों पर निगरानी मजबूत करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में दवाओं की कीमतों और मरीजों से कथित तौर पर अधिक वसूली को लेकर राजनीतिक विवाद भी सामने आया था। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी दवाओं की कीमतों के मुद्दे को उठाते हुए सरकार से कार्रवाई की मांग की थी।

नए नियम लागू होने के बाद मरीजों के लिए सबसे बड़ा बदलाव यही होगा कि दवा खरीदने से पहले वे QR कोड या वेबसाइट के जरिए यह देख सकेंगे कि फार्मेसी ने वह दवा कितने में खरीदी और उसे कितने में बेचा जा रहा है।

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