हमर छत्तीसगढ़

97.75 लाख लेकर जमीन की रजिस्ट्री नहीं करने का आरोप, दूसरे को जमीन बेचने की शिकायत

  • जमीन का सौदा, 97.75 लाख भुगतान और फिर रजिस्ट्री से इनकार!इकरारनामा के बाद 11.50 एकड़ जमीन का सौदा,दंपती के खिलाफ थाने में शिकायत
  • करोड़ों की जमीन के सौदे में लाखों का लेनदेन, रजिस्ट्री नहीं हुई तो पुलिस तक पहुंचा मामला “पूरी रकम ले ली, अब जमीन भी दूसरे को बेच रहे हैं” शिकायतकर्ता ने लगाया धोखाधड़ी का आरोप

रायपुर। थाना सिविल लाइन रायपुर में प्रफुल्ल कुमार वैद्य ने आशादेवी साहू उर्फ उमादेवी साहू एवं उनके पति अशवंत दास साहू उर्फ दास जी साहू के खिलाफ जमीन के सौदे में धोखाधड़ी किए जाने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कर उचित कार्रवाई की मांग की है।

शिकायतकर्ता के अनुसार, जनवरी 2025 में ग्राम बैमचा, तहसील तिल्दा, जिला रायपुर स्थित विभिन्न खसरों की कुल लगभग 11.50 एकड़ भूमि को 8.50 लाख रुपये प्रति एकड़ की दर से खरीदने का सौदा तय हुआ था। शिकायत में भूमि की कुल कीमत करीब 97.75 लाख रुपये बताई गई है।

शिकायतकर्ता का कहना है कि सौदे के तहत चेक एवं नगद के माध्यम से अलग-अलग किश्तों में पूरी रकम का भुगतान किया गया। इसके बाद 7 जनवरी 2025 को 50 रुपये के स्टाम्प पेपर पर विक्रय इकरारनामा भी तैयार किया गया था। शिकायत के मुताबिक, भूमि का सीमांकन एवं बंटवारा कराने के बाद रजिस्ट्री कराने की जिम्मेदारी आशादेवी साहू उर्फ उमादेवी साहू की थी।

लेकिन शिकायतकर्ता का आरोप है कि पूरी राशि प्राप्त करने के बावजूद अब तक भूमि की रजिस्ट्री नहीं कराई गई। आरोप यह भी है कि जब शिकायतकर्ता ने रजिस्ट्री के लिए बार-बार संपर्क किया तो कथित तौर पर टालमटोल की जाती रही। बाद में जानकारी मिली कि इकरारनामा में शामिल भूमि की कुछ जमीन को उसकी पूरी कीमत प्राप्त करने के बाद किसी अन्य व्यक्ति को बेचने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे शिकायतकर्ता को अपने साथ धोखाधड़ी होने की आशंका है।

शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि आशादेवी साहू एवं उनके पति अश्वत दास साहू द्वारा मिलकर रजिस्ट्री कराने में आनाकानी की जा रही है तथा उन्हें परेशान किया जा रहा है।

प्रफुल्ल कुमार वैद्य ने पुलिस से पूरे मामले की जांच कर आशादेवी साहू उर्फ उमादेवी साहू एवं अशवंत दास साहू उर्फ दास जी साहू के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर उचित कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।

शिकायत के साथ विक्रय इकरारनामा एवं अन्य दस्तावेजों की प्रतियां भी संलग्न किए जाने की बात कही गई है।

अब देखना होगा कि पुलिस जांच में जमीन के सौदे, भुगतान और इकरारनामा से जुड़े आरोपों की क्या सच्चाई सामने आती है।

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