हमर छत्तीसगढ़

ACB का बड़ा ट्रैप: रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए प्रभारी सिविल सर्जन

भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) बिलासपुर की टीम ने सक्ती जिला अस्पताल के प्रभारी सिविल सर्जन संतोष कुमार पटेल को 1 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोपी के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 के तहत विधिक कार्रवाई की जा रही है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिला अस्पताल सक्ती में फार्मासिस्ट ग्रेड-2 के पद पर अटैचमेंट पर कार्यरत गंगा प्रसाद रत्नाकर ने एसीबी बिलासपुर से शिकायत की थी कि उनकी मूल पदस्थापना मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय, पोरथा, जिला सक्ती में है। फरवरी 2026 से वे जिला अस्पताल सक्ती में संबद्ध होकर कार्य कर रहे हैं।

शिकायत में बताया गया कि प्रभारी सिविल सर्जन संतोष कुमार पटेल द्वारा मई और जून 2026 का पे-डाटा तैयार कर सीएमएचओ कार्यालय नहीं भेजा जा रहा था। आरोप है कि सिविल सर्जन ने कहा कि चूंकि फरवरी 2026 से वे उनके अधीन कार्यरत हैं, इसलिए फरवरी से जून 2026 तक प्रति माह 20 हजार रुपये के हिसाब से कुल 1 लाख रुपये रिश्वत देने होंगे। रिश्वत मिलने के बाद ही पे-डाटा अग्रेषित किया जाएगा।

शिकायतकर्ता रिश्वत देने के पक्ष में नहीं था और उसने आरोपी को रंगे हाथ पकड़वाने का निर्णय लिया। शिकायत मिलने के बाद एसीबी बिलासपुर ने गोपनीय सत्यापन कराया, जिसमें शिकायत प्रथम दृष्टया सही पाई गई। इसके बाद एसीबी ने योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप की कार्रवाई की।

गुरुवार 23 जुलाई 2026 को आरोपी ने शिकायतकर्ता को रिश्वत की रकम लेकर डभरा स्थित अपने अस्थायी निवास के पास बुलाया। एसीबी की टीम पहले से ही मौके पर तैनात थी। आरोपी ने बाद में शिकायतकर्ता को डभरा कॉलेज मोड़ के पास मिलने के लिए बुलाया। रात लगभग 9 बजे जैसे ही आरोपी शिकायतकर्ता के स्कॉर्पियो वाहन में बैठा और 1 लाख रुपये की रिश्वत की राशि अपने कब्जे में ली, पहले से घात लगाए बैठी एसीबी टीम ने उसे तत्काल दबोच लिया।

एसीबी ने आरोपी के कब्जे से 1 लाख रुपये की रिश्वत की राशि बरामद कर ली। इसके बाद आरोपी को गिरफ्तार कर उसके विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 के अंतर्गत आगे की वैधानिक कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है।

यह कार्रवाई एक बार फिर सरकारी कार्यालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ एसीबी की सक्रियता को दर्शाती है। मामले की आगे की जांच जारी है और एसीबी यह भी पता लगा रही है कि आरोपी द्वारा इस प्रकार की अवैध मांग पहले भी की गई थी या नहीं।

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