नाबालिग से दुष्कर्म: मामले में बाल अधिकार संरक्षण आयोग सख्त, रायपुर DCPO को बयान दर्ज करने के निर्देश

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के धरसींवा थाना क्षेत्र अंतर्गत सिलयारी में 13 वर्षीय नाबालिग बालिका के कथित अपहरण और दुष्कर्म के मामले को छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने बेहद गंभीरता से लिया है। सोशल मीडिया और विभिन्न समाचार माध्यमों में आई खबरों के बाद आयोग ने इस संवेदनशील प्रकरण पर स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे औपचारिक रूप से पंजीबद्ध कर जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, इस गंभीर मामले की शुरुआती जांच के दौरान कथित तौर पर पीड़िता द्वारा किसी भी अपराध से इंकार किए जाने की बात कहकर फाइल को बंद करने की तैयारी की जा रही थी। हालांकि, बाद में सोशल मीडिया पर इस घटना से जुड़े कुछ वीडियो और ऑडियो तेजी से वायरल हो गए। नए सबूत और तथ्य सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आया और दोबारा की गई। जांच के आधार पर दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। वहीं, जांच में घोर लापरवाही बरतने के आरोप में संबंधित चौकी प्रभारी पर गाज गिरी है और उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने इस पूरे घटनाक्रम को नाबालिगों की सुरक्षा, पुलिस जांच की कार्यप्रणाली और बाल अधिकारों के संरक्षण से जुड़ा अत्यंत गंभीर विषय माना है। आयोग ने ‘बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005’ की धारा 13(1)(ज) एवं धारा 14 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए जिला बाल संरक्षण अधिकारी (DCPO), रायपुर को कड़े निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने DCPO को पीड़ित बालिका का बयान दर्ज कर जल्द से जल्द विस्तृत प्रतिवेदन (विस्तृत रिपोर्ट) प्रस्तुत करने को कहा है।
साथ ही आयोग ने बालिका को उसके अभिभावकों सहित 15 जून 2026 को आयोग के समक्ष उपस्थित होने के लिए कहा है। सुनवाई के दौरान मामले में पॉक्सो अधिनियम, किशोर न्याय अधिनियम तथा अन्य प्रासंगिक कानूनी प्रावधानों के पालन की भी समीक्षा की जाएगी।



