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 इनकम टैक्स फाइलिंग के बाद कब आएगा आपका रिफंड, ऐसे चेक करें पैसा और अपना लाइव स्टेटस

असेसमेंट ईयर 2025-26 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की डेडलाइन खत्म हो चुकी है। जिन लोगों ने समय से अपना ITR फाइल कर दिया है, उन्हें अब अपने रिफंड का बेसब्री से इंतजार है। अगर आपने भी इनकम टैक्स रिटर्न समय पर फाइल कर दिया है, तो आपके मन में रिफंड मिलने का सवाल जरूर होगा।

आयकर विभाग द्वारा रिफंड तभी जारी किया जाता है जब आप अपने आईटीआर का ई-वेरिफिकेशन पूरी तरह से कर लेते हैं। कई लोगों को यह पता ही नहीं होता कि आईटीआर फाइल करने के बाद रिफंड प्रोसेस कैसे होता है और पैसा खाते में कब आता है। आइए बहुत ही आसान भाषा में समझते हैं कि इनकम टैक्स रिफंड से जुड़ा पूरा नियम और प्रक्रिया क्या है।

सिर्फ आईटीआर फाइल कर देने से ही रिफंड का पैसा बिल्कुल भी जारी नहीं होता है। सबसे पहले आपको अपने रिटर्न का ई-वेरिफिकेशन करना बहुत ही ज्यादा जरूरी होता है। जब आपका ई-वेरिफिकेशन पूरा हो जाता है, तभी आयकर विभाग आपके रिटर्न की प्रोसेसिंग बहुत तेजी से शुरू करता है। अगर आपके रिटर्न में कोई गलती नहीं है तो आमतौर पर 7 से 30 दिनों के भीतर रिफंड सीधे खाते में आ जाता है।

अगर आपके आईटीआर में बिजनेस इनकम, कैपिटल गेन या कई तरह के बड़े डिडक्शन शामिल हैं, तो विभाग गहरी जांच करता है। ऐसे जटिल मामलों में रिफंड बैंक खाते में आने में 2 से 4 सप्ताह या उससे अधिक का लंबा समय भी लग सकता है। इसके अलावा बैंक खाते की गलत जानकारी, पैन और बैंक खाते का मिलान न होने से भी पैसा आसानी से रुक जाता है। फॉर्म 26AS और एआईएस में भारी अंतर होने से भी आपके रिफंड की पूरी प्रक्रिया बीच में ही रुक सकती है।

रिफंड आपको तभी मिलेगा जब जमा किया गया टैक्स आपकी वास्तविक टैक्स देनदारी से कहीं ज्यादा होगा। इसके साथ ही बैंक खाता पहले से प्री-वैलिडेटेड होने के साथ आपके पैन कार्ड से भी लिंक होना बेहद आवश्यक है। अगर आप अपना रिफंड जल्दी चाहते हैं, तो आईटीआर फाइल करने के तुरंत बाद ई-वेरिफिकेशन का काम जरूर करें। रिटर्न में किसी भी तरह की गलत या अधूरी जानकारी देने से आपको हमेशा बहुत ही सावधानी से बचना चाहिए।

अगर बहुत समय बीतने के बाद भी रिफंड नहीं मिला है, तो उसका स्टेटस आप ऑनलाइन भी आसानी से देख सकते हैं। इसके लिए इनकम टैक्स पोर्टल पर जाकर अपने पैन और पासवर्ड से लॉगिन करके अपना रिफंड स्टेटस चेक करना होता है। अगर आयकर विभाग की ओर से रिफंड जारी करने में देरी होती है, तो धारा 244A के तहत आपको ब्याज मिलता है। टैक्सपेयर्स को रिफंड की रुकी हुई राशि पर 0.5 प्रतिशत प्रति माह की दर से यह विशेष ब्याज दिया जाता है।

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