300 ट्रांसपोर्टर अनिश्चितकालीन महाबंद पर, सप्लाई प्रभावित होने की आशंका

■ BPS की कथित तानाशाही व असंवैधानिक ब्लैकलिस्टिंग के विरोध में आर-पार की लड़ाई के मूड में ट्रांसपोर्टर्स
■ दवाइयों, खाद्यान्न, किराना व ऑटो पार्ट्स जैसी आवश्यक सामग्रियों की सप्लाई ठप होने की आशंका
रायपुर/जगदलपुर। बस्तर मार्ग पर परिवहन को लेकर जारी विवाद एक बार फिर उग्र रूप ले चुका है। बस्तर परिवहन संघ (BPS) की कार्यप्रणाली, वाहनों की कथित असंवैधानिक ब्लैकलिस्टिंग और स्वतंत्र परिवहन में लगातार दखलअंदाजी के विरोध में लगभग 300 परचून (चिल्लर) ट्रांसपोर्टरों ने सोमवार से अनिश्चितकालीन महाबंद का बड़ा ऐलान कर दिया है।
पीड़ित ट्रांसपोर्टरों का गंभीर आरोप है कि BPS द्वारा पूर्व में हुए समझौतों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। गाड़ियों को जबरन रोकने, अवैध ब्लैकलिस्टिंग करने और निष्पक्ष व्यापार के संवैधानिक अधिकार को प्रभावित करने से ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़े लोगों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
रोजमर्रा की सप्लाई पर गहराएगा संकट
सोमवार से शुरू हो रहे इस अनिश्चितकालीन महाबंद के कारण रायपुर से बस्तर संभाग को होने वाली दैनिक आवश्यकताओं की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो सकती है। इसमें मुख्य रूप से:
□ खाद्यान्न, अनाज व किराना सामग्री
□ जीवनरक्षक दवाइयाँ एवं स्वास्थ्य उपकरण
□ ऑटो पार्ट्स, गैरेज सामग्री व अन्य औद्योगिक सामान
प्रशासनिक दावों पर उठे गंभीर सवाल
हाल ही में प्रशासनिक मध्यस्थता और हस्तक्षेप से इस विवाद के सुलझ जाने का दावा किया गया था। किंतु, समाधान के दावों के बीच ट्रांसपोर्टर्स द्वारा पुनः महाबंद का आह्वान प्रशासन की भूमिका और BPS की मंशा पर बड़े सवाल खड़े करता है।
मुख्य प्रश्न:
(1)यदि प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद विवाद का स्थाई समाधान हो चुका था, तो सोमवार से दोबारा महाबंद की नौबत क्यों आई?
(2)क्या BPS प्रशासन के दिशा-निर्देशों और पूर्व समझौतों को मानने से इनकार कर रहा है?
(3)आम जनता और व्यापारियों को होने वाली भारी असुविधा का जिम्मेदार कौन होगा?
व्यापारी व ट्रांसपोर्ट संगठनों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि इस मामले में BPS का रुख स्पष्ट कराया जाए और स्वतंत्र परिवहन व्यवस्था बहाल करने हेतु तत्काल कड़े कदम उठाए जाएं।


