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Rakhi Sawant Jhansi Court Case: अभिनेत्री राखी सावंत को झांसी कोर्ट से बड़ी राहत, 2010 के पुराने मामले में गैर जमानती वारंट रद्द

झांसी: अभिनेत्री राखी सावंत को वर्ष 2010 के एक पुराने मामले में झांसी की अदालत से बड़ी राहत मिली है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के पहले से लागू स्थगन आदेश (Stay Order) की प्रति अदालत में पेश किए जाने के बाद फास्ट ट्रैक कोर्ट (FTC) ने उनके खिलाफ जारी गैर जमानती वारंट (NBW) को निरस्त कर दिया है।

1. हाईकोर्ट के स्टे ऑर्डर से मिली राहत

  • वारंट जारी होने की वजह: झांसी की FTC अदालत ने 16 अक्टूबर 2026 को राखी सावंत के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था, जिसमें उन्हें गिरफ्तार कर 1 दिसंबर को अदालत में पेश करने के निर्देश दिए गए थे।
  • अधिवक्ताओं की दलील: राखी सावंत की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ताओं (आशू सिंह और कृष्णा यादव) ने न्यायालय में पक्ष रखते हुए बताया कि इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट पहले ही 7 दिसंबर 2011 को स्थगन आदेश पारित कर चुका है।
  • वारंट निरस्त: वकीलों द्वारा हाईकोर्ट के पुराने आदेश की प्रति प्रस्तुत करने और दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद अदालत ने वारंट को रद्द कर दिया। इस फैसले से अभिनेत्री को फिलहाल गिरफ्तारी से बड़ी राहत मिल गई है।

2. क्या है पूरा विवाद? (‘राखी का इन्साफ’ मामला)

यह पूरा कानूनी विवाद साल 2010 में प्रसारित हुए चर्चित टीवी रियलिटी शो ‘राखी का इन्साफ’ से जुड़ा हुआ है:

  • शिकायत: झांसी के हंसारी निवासी सावित्री देवी ने प्रेमनगर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी।
  • आरोप: शिकायत में आरोप लगाया गया था कि शो के दौरान सावित्री देवी के बेटे लक्ष्मण अहिरवार को अपमानित किया गया था, जिसके कुछ समय बाद लक्ष्मण की मौत हो गई थी।
  • मां ने कार्यक्रम में राखी सावंत द्वारा कहे गए कथित अपमानजनक शब्दों को अपने बेटे की मौत की वजह बताते हुए मामला दर्ज कराया था।

3. 2011 से हाईकोर्ट में लंबित है मामला

  • प्राथमिकी और चार्जशीट को चुनौती देते हुए आरोपियों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
  • 7 दिसंबर 2011 को हाईकोर्ट ने मामले पर संज्ञान लेते हुए आगे की न्यायिक कार्रवाई पर रोक (Stay) लगा दी थी।
  • हालांकि, हाल ही में झांसी की अदालत द्वारा वारंट जारी होने के बाद अब हाईकोर्ट के पुराने आदेश का हवाला देकर इसे खारिज करवा दिया गया है। अधिवक्ताओं के मुताबिक, अब 1 दिसंबर की निर्धारित सुनवाई प्रभावी नहीं रही है और आगे की कार्यवाही हाईकोर्ट के आदेशों के अधीन होगी।
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