बंधेज पगड़ी में दिखे PM मोदी, लाल किले से दिया ‘वोकल फॉर लोकल’ का संदेश

नई दिल्ली। देश आज 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। इस अवसर पर देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया। स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान प्रधानमंत्री का पारंपरिक अंदाज एक बार फिर आकर्षण का केंद्र रहा।
इस बार प्रधानमंत्री मोदी राजस्थानी बंधेज पगड़ी में नजर आए। गहरे लाल रंग की इस आकर्षक पगड़ी पर सफेद रंग के छोटे-छोटे बिंदु बने हुए थे। प्रधानमंत्री के इस पारंपरिक परिधान को भारतीय संस्कृति, हस्तकला और स्थानीय कारीगरों को बढ़ावा देने के संदेश से जोड़कर देखा जा रहा है।
बंधेज पगड़ी क्यों है खास?
बंधेज भारत की पारंपरिक टाई एंड डाई हस्तकला है। इसे कपड़े को विशेष तरीके से धागों से बांधकर और फिर अलग-अलग रंगों में रंगकर तैयार किया जाता है। कपड़े को बांधने और रंगने की प्रक्रिया के कारण इस पर आकर्षक बिंदु और पैटर्न उभरते हैं।
राजस्थान और गुजरात में बंधेज को विशेष महत्व प्राप्त है। इसे शुभता, सम्मान, गौरव और उत्सव का प्रतीक माना जाता है। शादी-विवाह, धार्मिक आयोजनों और अन्य महत्वपूर्ण अवसरों पर भी बंधेज के परिधानों का इस्तेमाल किया जाता है।
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बंधेज पगड़ी पहनना भारतीय पारंपरिक कला और स्थानीय कारीगरों के प्रति सम्मान के संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। इससे ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को भी बल मिलता है।
लाल रंग और सफेद बिंदुओं का आकर्षण
प्रधानमंत्री की पगड़ी का गहरा लाल रंग समारोह में खास तौर पर नजर आया। भारतीय परंपरा में लाल रंग को ऊर्जा, उत्साह, शक्ति और शुभता से जोड़ा जाता है। वहीं, सफेद बिंदुओं वाला पैटर्न बंधेज कला की विशिष्ट पहचान है।
इस पारंपरिक पगड़ी ने स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान प्रधानमंत्री के व्यक्तित्व को एक अलग सांस्कृतिक रंग दिया और देश की समृद्ध हस्तकला पर भी ध्यान आकर्षित किया।
पारंपरिक परिधान में दिखे PM मोदी
80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सफेद कुर्ता-पायजामा और खाकी रंग की जैकेट में नजर आए। इसके साथ पहनी गई राजस्थानी बंधेज पगड़ी उनके परिधान का सबसे खास हिस्सा रही।
प्रधानमंत्री स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने परिधान के जरिए अक्सर भारत की अलग-अलग क्षेत्रीय संस्कृतियों और पारंपरिक कलाओं को सम्मान देते नजर आते हैं। इस बार बंधेज पगड़ी के माध्यम से राजस्थान और गुजरात की पारंपरिक कला के साथ-साथ देश के स्थानीय बुनकरों और कारीगरों की मेहनत को भी प्रमुखता मिली।
स्थानीय कला को बढ़ावा देने का संदेश
प्रधानमंत्री मोदी की बंधेज पगड़ी सिर्फ एक पारंपरिक परिधान नहीं, बल्कि भारतीय हस्तकला और स्थानीय हुनर को सम्मान देने का प्रतीक भी बनी। स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय अवसर पर पारंपरिक भारतीय कला से जुड़े परिधान को अपनाने से देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और स्थानीय कारीगरों के काम को व्यापक पहचान मिलती है।
प्रधानमंत्री का यह अंदाज एक बार फिर ‘लोकल फॉर वोकल’ और भारतीय परंपराओं को प्रोत्साहित करने के संदेश को सामने लाता है।



