मेरठ नीला ड्रम कांड: क्या मां के गुनाह की सजा मासूम बच्ची को मिलनी चाहिए? उठी फांसी की सजा टालने की मांग

उत्तर प्रदेश के मेरठ में हुए सनसनीखेज ‘नीला ड्रम हत्याकांड’ ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। इस मामले में अदालत द्वारा दोषियों को मौत की सजा सुनाए जाने के बाद अब इस पर मानवीय और सामाजिक पहलुओं पर बहस छिड़ गई है। हाल ही में जिला कारागार पहुंचे जाने-माने कवि युगल—सौरभ जैन सुमन और डॉ. अनामिका जैन अम्बर—ने एक ऐसी मांग उठाई है, जिसने इस पूरे मामले को एक नया मोड़ दे दिया है।
क्या है पूरा मामला और कवियों की मांग?
जैनाचार्य सौरभ सागर जी महाराज के जन्म जयंती महोत्सव के सिलसिले में जब यह कवि युगल मेरठ जिला कारागार में बंदियों से मिलने पहुंचा, तो उनकी मुलाकात इस कांड की दोषी मुस्कान से भी हुई।
मुस्कान की स्थिति को बयां करते हुए डॉ. अनामिका जैन अम्बर ने बताया कि बातचीत के दौरान मुस्कान अपनी दुधमुंही बच्ची के भविष्य को लेकर बेहद लाचार और आंसुओं में डूबी नजर आई। इसे देखते हुए दोनों कवियों ने दरियादिली दिखाते हुए बच्ची के उज्ज्वल भविष्य और शिक्षा की जिम्मेदारी उठाने का ऐलान किया है।
साथ ही, उन्होंने अदालत से यह भावुक अपील की है कि “मासूम बच्ची के अपने पैरों पर खड़े होने और आत्मनिर्भर बनने तक मुस्कान की फांसी की सजा पर विचार किया जाए,” ताकि एक मां के किए गए अपराध की सजा किसी निर्दोष बच्चे के भविष्य को अंधेरे में न धकेल दे।
क्या कहते हैं इस केस के अहम पहलू?
- मौत की सजा का फैसला: मेरठ की जिला अदालत ने गत 14 अक्टूबर को चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को फांसी (मृत्युदंड) की सजा सुनाई थी।
- भयानक वारदात: सौरभ राजपूत की हत्या कर उसके शव के टुकड़े-टुकड़े कर नीले ड्रम में छिपाने की इस घटना ने हर किसी को दहला दिया था। फैसले के बाद मृतक सौरभ के परिजनों (मां रेनू देवी और भाई राहुल) ने कोर्ट के इस फैसले पर राहत और संतोष जताया था।
- कानूनी लड़ाई जारी: दूसरी ओर, इस कड़े फैसले के खिलाफ दोषियों के वकीलों ने इसे इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जहां मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
मानवीय संवेदना बनाम न्याय की तराजू
एक तरफ जहां अदालत का यह फैसला जघन्य अपराध के लिए न्याय का प्रतीक माना जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ इस बात पर भी चर्चा तेज हो गई है कि क्या न्याय प्रक्रिया में उन मासूमों के भविष्य का भी ध्यान रखा जाना चाहिए जिनका इस अपराध से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब कानूनी दांवपेच के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं का यह पहलू भी चर्चा का मुख्य केंद्र बन गया है।



