Gold Price: और सस्ता होगा सोना? ज्वेलर्स ने घटाई खरीदारी, कीमतों पर टिकी सबकी नजर

सोने की कीमतों में हालिया गिरावट के बाद भारतीय ज्वेलर्स फिलहाल बड़ी खरीदारी करने से बच रहे हैं। देश में त्योहारों और शादियों का सीजन शुरू होने से पहले आमतौर पर सोने की मांग बढ़ जाती है, लेकिन इस बार कारोबारी कीमतों के और नीचे आने का इंतजार करते नजर आ रहे हैं।
MMTC-PAMP के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर समित गुहा के मुताबिक, देश की बड़ी ज्वेलरी कंपनियां अभी पूरी तरह से बाजार में सक्रिय नहीं हुई हैं। फिलहाल छोटे और मझोले ज्वेलर्स की ओर से खरीदारी देखने को मिल रही है। कुछ कारोबारियों ने दोबारा ऑर्डर देना भी शुरू किया है, लेकिन बड़े ज्वेलर्स की तरफ से मांग अभी अपेक्षाकृत कमजोर है।
रिकॉर्ड स्तर से काफी नीचे आया सोना
हाल के महीनों में सोने की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। जनवरी में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव 5,400 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच गया था। इसके बाद कीमतों में तेज गिरावट आई और पिछले सप्ताह भाव जुलाई के बाद पहली बार 4,000 डॉलर प्रति औंस के नीचे चला गया।
कीमतों में इस गिरावट के बावजूद ज्वेलर्स जल्दबाजी में स्टॉक बढ़ाने से बच रहे हैं। कारोबारियों को आशंका है कि अगर गिरावट का दौर आगे भी जारी रहा तो मौजूदा कीमतों पर बड़ी मात्रा में सोना खरीदना नुकसान का सौदा हो सकता है।
कीमत बढ़ने पर बढ़ती है ज्वेलर्स की खरीदारी
ज्वेलरी कारोबार में सोने की खरीदारी काफी हद तक कीमतों के अनुमान पर निर्भर करती है। जब कारोबारियों को लगता है कि कीमतें आगे बढ़ सकती हैं, तो वे पहले ही स्टॉक बढ़ाने लगते हैं। इससे उन्हें भविष्य में महंगी खरीदारी से बचने में मदद मिलती है।
इसके उलट, जब कीमतों में और गिरावट की संभावना नजर आती है तो ज्वेलर्स नई खरीदारी रोकने के साथ अपने मौजूदा स्टॉक को भी कम करने की कोशिश करते हैं। फिलहाल भारतीय बाजार में कुछ ऐसा ही माहौल दिखाई दे रहा है।
आयात शुल्क बढ़ने से भी मांग पर असर
भारत में सोने की मांग पर बढ़े हुए आयात शुल्क का भी असर पड़ा है। देश अपनी सोने की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। आयात महंगा होने से घरेलू बाजार में सोने की लागत बढ़ती है, जिसका सीधा असर ज्वेलरी की कीमत और ग्राहकों की खरीदारी पर पड़ सकता है।
समित गुहा के अनुसार, आयात शुल्क में बढ़ोतरी ने सोने की खरीदारी को प्रभावित किया है। बाजार में आधिकारिक चैनल के साथ-साथ अनौपचारिक कारोबार का हिस्सा बढ़ने की बात भी सामने आई है।
त्योहारों के सीजन पर टिकी नजर
भारत में अक्टूबर से दिसंबर के बीच सोने की मांग आमतौर पर मजबूत रहती है। दिवाली और शादी के सीजन के कारण इस अवधि में ज्वेलरी की खरीदारी बढ़ जाती है। ऐसे में बाजार की नजर अब आने वाले त्योहारी सीजन पर है।
हालांकि, अगर कीमतों में और गिरावट आती है तो ग्राहकों की ओर से खरीदारी बढ़ सकती है। वहीं, कीमतों में तेजी शुरू होने की स्थिति में ज्वेलर्स भी अपनी खरीदारी बढ़ा सकते हैं।
चीन की तुलना में भारत में मांग कमजोर
सोने की कीमतों में गिरावट के बाद चीन के बाजार में मांग में तेजी देखी गई है। वहीं भारत में ज्वेलर्स अभी कीमतों को लेकर सावधानी बरत रहे हैं। इस अंतर से पता चलता है कि भारतीय बाजार में फिलहाल कारोबारी और ग्राहक दोनों ही कीमतों की दिशा को लेकर इंतजार की स्थिति में हैं।
सोने की बिक्री में भी नरमी
MMTC-PAMP के मुताबिक, कंपनी की सोने की बिक्री पिछले साल की तुलना में कमजोर रही है। हालांकि, छोटे सिक्कों और गोल्ड बार की मांग बनी हुई है। सितंबर में बिक्री लगभग पिछले साल के स्तर के आसपास रही, जबकि अक्टूबर में खरीदारी में कुछ सुधार देखने को मिला।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सोने की कीमतों में स्थिरता आती है या दोबारा तेजी का संकेत मिलता है, तो ज्वेलर्स की खरीदारी में भी तेजी आ सकती है। फिलहाल कारोबारी कीमतों की अगली दिशा पर नजर बनाए हुए हैं।



