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डायनासोर की सूरत, शुतुरमुर्ग जैसी चाल! 21 करोड़ साल बाद धरती फाड़ निकला जानवर

नई दिल्ली: एक मगरमच्छ की कल्पना करें जिसके दांत ही न हों. अब सोचें कि वह दो पैरों पर खड़ा है. उसके हाथ बहुत छोटे हैं. यह जीव किसी दलदल में रहने वाले मगरमच्छ से बिल्कुल अलग दिखता है. यह स्केल्स वाले एक शुतुरमुर्ग जैसा लगता है. वैज्ञानिकों ने ऐसे ही एक विचित्र जीव की पहचान की है. इसका नाम लैब्रूजास्यूकस एक्सपेक्टेटस रखा गया है. इसके कंकाल साल 2006 में न्यू मैक्सिको की एक खदान से निकाले गए थे. हाल ही में जर्नल ऑफ वर्टिब्रेट पेलियोन्टोलॉजी में इसके बारे में विस्तार से बताया गया है. यह जीव लगभग 212 मिलियन साल पहले लेट ट्रायसिक काल में धरती पर मौजूद था. यह मगरमच्छ के परिवार का हिस्सा है. इसके बावजूद यह आज के खूंखार मगरमच्छों जैसा बिल्कुल नहीं दिखता था. इसका चलना और शारीरिक बनावट बहुत अलग थी.

[q]आखिर आधुनिक मगरमच्छों से यह विचित्र जीव कैसे अलग था?

[q]विकास क्रम में डायनासोर और इस जीव में क्या समानताएं थीं?

[ans]दो बिल्कुल अलग वंशावली वाले जीवों ने जीवित रहने के लिए एक जैसे तरीके अपनाए. इन दोनों के बीच करोड़ों सालों का अंतर था. टर्नर ने एक स्टेटमेंट में कहा, ‘हम ट्रायसिक काल में आधुनिक जानवरों के कई सफल तरीके देखते हैं’. शुवोसॉर इस कन्वर्जेंट इवोल्यूशन का एक शानदार उदाहरण हैं. मगरमच्छ के रिश्तेदारों के लिए दो पैरों पर चलना एक अनोखा रास्ता है. डायनासोर और बाद के पक्षियों ने भी यही रास्ता अपनाया था. स्पष्ट रूप से इन जानवरों के लिए यह तरीका काफी सफल रहा और वे लंबे समय तक धरती पर जिंदा रहे.[/ans]डायनासोर की सूरत, शुतुरमुर्ग जैसी चाल! 21 करोड़ साल बाद धरती फाड़ निकला जानवर

डायनासोर जैसे दिखने वाले इस मगरमच्छ के पूर्वज कहां से आए थे? (Photo Made With AI)

[q]घोस्ट रेंच में खोजे गए इस नए जीव का नाम कैसे पड़ा?[/q]

[ans]उत्तरी न्यू मैक्सिको का घोस्ट रेंच दशकों से जीवाश्मों का केंद्र रहा है. इस रेंच का पुराना स्पेनिश नाम रैंचोस डी लॉस ब्रुजोस है. इसका मतलब चुड़ैलों का रेंच होता है. इसी नाम से इस नए जीव के नाम का पहला हिस्सा लैब्रूजा लिया गया है. लैब्रूजा का मतलब चुड़ैल होता है. इसके साथ ग्रीक शब्द स्यूकस को जोड़ा गया है. स्यूकस का मतलब मगरमच्छ होता है. इस प्रजाति का नाम एक्सपेक्टेटस एक अलग ही कहानी बयां करता है. पेलियोन्टोलॉजिस्ट्स को इस इलाके में पहले ही दो अन्य शुवोसॉर मिल चुके थे. इनमें से एक पुराना और एक नया था.[/ans]

[q]जीवाश्मों की खोज से वैज्ञानिकों को कौन सी नई उम्मीद मिली?[/q]

[ans]नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम ऑफ लॉस एंजिल्स काउंटी के नाथन स्मिथ ने इस बारे में जानकारी दी. स्मिथ ने कहा, ‘ट्रायसिक काल के शुरुआती और बाद के शुवोसॉर मिलने से हम पेलियोन्टोलॉजिस्ट्स को एक उम्मीद थी’. हमें पता था कि इन दोनों के बीच के समय का भी कोई जीव जरुर होगा. इस खोज में पैर और बांह की हड्डियां मिली हैं. इसके साथ ही रीढ़ के हिस्से और अन्य टुकड़े भी मिले हैं. रिसर्च टीम के अनुसार लैब्रूजास्यूकस अपने रिश्तेदारों से केवल थोड़ा ही अलग था. यह पश्चिमी उत्तरी अमेरिका में कम से कम 10 मिलियन सालों तक ऐसा ही रहा. यह उस समय के जानवरों के शरीर में होने वाले बदलावों को समझने में मदद करता है.

[q]घोस्ट रेंच की नई खोजों से इतिहास कैसे बदल रहा है?[/q]

[ans]लैब्रूजास्यूकस अब दुनिया भर में चौथा पहचाना गया शुवोसॉर है. यह उत्तरी अमेरिका में मिलने वाला तीसरा शुवोसॉर बन गया है. इससे पहले टेक्सास और अर्जेंटीना में भी इसके नमूने मिल चुके हैं. यह खोज पश्चिमी उत्तरी अमेरिका में इनकी मौजूदगी को दर्शाती है. घोस्ट रेंच से हाल ही में एक और खोज हुई है. इसका नाम इओस्फोरोस्यूकस लैक्रिमोज़ा है. यह सियार के आकार का मगरमच्छ का रिश्तेदार था. येल पेलियोन्टोलॉजिस्ट मिरांडा मार्गुलिस-ओहनुमा ने बताया कि शुरुआती मगरमच्छों के लिए हमारे पास बहुत कम डेटा है. हर नया जीवाश्म कहानी को बदल रहा है और हमें इस रहस्यमयी मगरमच्छ के बारे में नई जानकारी दे रहा है.

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