व्यापार जगत

सरकार का चांदी पर बड़ा फैसला, भाव गिरेंगे या चढ़ेंगे?

भारत में इन दिनों चांदी खरीदने वालों के मन में एक ही बड़ा सवाल है— क्या सप्लाई बढ़ने से चांदी सस्ती होगी? त्योहारों के सीजन से ठीक पहले सरकार ने ट्रेडर्स और बैंक डीलर्स को छह महीने के लिए नए इंपोर्ट परमिट जारी किए हैं। इसके तहत करीब 6,000 टन चांदी का आयात किया जा सकता है, जिससे बाजार में इसकी उपलब्धता काफी हद तक सुधरने की उम्मीद है।

आयात पर सख्ती और जून का झटका

भारत दुनिया के सबसे बड़े चांदी बाजारों में शुमार है और अपनी जरूरत का लगभग पूरा हिस्सा विदेशों से ही मंगाता है।

  • मई में सरकार ने चांदी आयात के नियमों को सख्त कर दिया था, जिसके तहत हर खेप के साथ यह प्रमाण देना अनिवार्य किया गया कि चांदी किस देश से आई है।
  • इसके अलावा, सोने और चांदी पर इंपोर्ट टैक्स भी दोगुने से ज्यादा बढ़ा दिए गए थे।
  • इन कड़े नियमों के चलते जून में भारत का चांदी आयात गिरकर महज 37 टन पर आ गया, जो पिछले तीन सालों का सबसे निचला मासिक स्तर था। हालांकि, Metals Focus के आंकड़ों के मुताबिक सितंबर में यह सुधरकर 328 टन पहुंच गया।

त्योहारी मांग और घटता ‘प्रीमियम’

अक्टूबर से देश में त्योहारों का सीजन शुरू हो चुका है और आगामी 8 नवंबर को दिवाली है। ऐसे में 6,000 टन के नए परमिट बाजार के लिए संजीवनी साबित हो सकते हैं।

Metals Focus के प्रिंसिपल कंसल्टेंट हर्षल बारोट का मानना है कि ये नए परमिट त्योहारी मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त हैं। इससे बाजार की तंगी कम होगी और प्रीमियम में भारी गिरावट आएगी।

प्रीमियम क्या है? ग्लोबल बेंचमार्क भाव के मुकाबले भारत में खरीदारों को जो अतिरिक्त कीमत चुकानी पड़ती है, उसे प्रीमियम कहते हैं। कम सप्लाई के कारण यह प्रीमियम बढ़ जाता है, लेकिन सप्लाई बढ़ने से यह अतिरिक्त बोझ कम हो जाता है।

  • चांदी कारोबारी मोनल ठक्कर के अनुसार, गुरुवार को भारत में चांदी का प्रीमियम गिरकर ग्लोबल भाव के मुकाबले करीब 50 सेंट प्रति औंस पर आ गया, जो एक हफ्ता पहले 2 डॉलर प्रति औंस था।

क्या चांदी सच में सस्ती होगी? यह समझना जरूरी है

भले ही प्रीमियम कम हो रहा है, लेकिन यह मान लेना जल्दबाजी होगी कि चांदी का कुल भाव बहुत ज्यादा गिर जाएगा। ग्राहकों को मिलने वाला अंतिम भाव निम्नलिखित बातों पर निर्भर करता है:

  1. ग्लोबल सिल्वर प्राइस (अंतरराष्ट्रीय बाजार के दाम)
  2. अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल
  3. सरकार का इंपोर्ट टैक्स
  4. ज्वेलरी या मेकिंग पर लगने वाले अन्य खर्च

पिछले साल का ‘शॉर्ट स्क्वीज’ और इस बार का बदला माहौल

पिछले साल भारत ने 7,000 टन से ज्यादा चांदी आयात की थी, जिससे ग्लोबल मार्केट में सप्लाई पर भारी दबाव पड़ा था और ‘शॉर्ट स्क्वीज’ की स्थिति बन गई थी। सट्टेबाजों की भारी लिवाली के चलते इस साल जनवरी में चांदी का भाव 121 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर को छू गया था।

लेकिन इस बार तस्वीर अलग है:

  • कम स्टॉक: इस साल रिटेलर्स और होलसेलर्स ने पिछले साल की तरह बड़े पैमाने पर स्टॉक जमा नहीं किया है।
  • सावधानी: पिछले साल ऊंचे दामों पर चांदी खरीदकर नुकसान उठाने वाले निवेशक इस बार सतर्क हैं। भाव में नरमी के बावजूद वे संभलकर कदम रख रहे हैं।
  • वैश्विक उथल-पुथल: ईरान युद्ध के बाद ऊर्जा के दाम बढ़ने और वैश्विक महंगाई की चिंताओं के कारण गुरुवार को स्पॉट सिल्वर (तत्काल डिलीवरी का भाव) लगभग 56 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था।
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