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अनंत सिंह पर गिरफ्तारी का खतरा! सुप्रीम कोर्ट में जमानत रद्द करने की याचिका पर सुनवाई, बढ़ीं मुश्किलें

पटना। बिहार के मोकामा विधायक अनंत सिंह की मुश्किलें लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। राजनीतिक विवादों के बीच अब उनकी जमानत पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। दुलारचंद यादव के पोते की ओर से पटना हाईकोर्ट के जमानत आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। इस मामले में 30 अक्टूबर को सुनवाई निर्धारित है। ऐसे में सबकी नजर शीर्ष अदालत के रुख पर टिकी हुई है।

अनंत सिंह को मोकामा में दुलारचंद यादव की हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया था। विधानसभा चुनाव के दौरान हुई इस घटना के बाद उन्हें जेल जाना पड़ा था। जेल में रहते हुए उन्होंने विधानसभा चुनाव जीता। इसके बाद मार्च में पटना हाईकोर्ट से जमानत मिलने पर वह जेल से बाहर आ गए थे। अब उनकी जमानत रद्द करने की मांग ने मामले को फिर चर्चा में ला दिया है।

जेडीयू से निष्कासन के बाद बढ़ा राजनीतिक संकट

अनंत सिंह की मुश्किलें सिर्फ कानूनी मोर्चे तक सीमित नहीं हैं। बिहार की राजनीति में भी उनके सामने चुनौतियां बढ़ती दिखाई दे रही हैं। जेडीयू उम्मीदवार नीरज कुमार के विरोध और जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी अनुज सिंह के समर्थन को लेकर उनका विवाद सुर्खियों में है।

बताया जा रहा है कि अनंत सिंह ने पटना स्नातक सीट पर जेडीयू उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ खुलकर नाराजगी जताई और जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी का समर्थन किया। इस घटनाक्रम के बाद पार्टी ने उनके खिलाफ कार्रवाई की। वहीं, उनकी विधायकी और सरकारी आवास को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

पत्नी नीलम देवी को लेकर भी कार्रवाई

राजनीतिक घटनाक्रम के बीच अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी को लेकर भी प्रशासनिक कदम उठाए जाने की खबर है। रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें 20 सूत्री समिति से हटाया गया है और आवंटित सरकारी बंगला खाली करने के लिए 30 दिन का समय दिया गया है।

इन घटनाओं के कारण अनंत सिंह के राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, उनकी विधानसभा सदस्यता पर कोई अंतिम फैसला होने की स्थिति में आधिकारिक आदेश की पुष्टि जरूरी होगी।

AK-47 मामले में भी रह चुके हैं चर्चा में

अनंत सिंह का विवादों से पुराना नाता रहा है। वर्ष 2019 में उनके पैतृक आवास पर पुलिस की छापेमारी के दौरान एके-47 और अन्य सामान बरामद होने का मामला सामने आया था। इस केस में सजा के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हो गई थी और मोकामा सीट पर हुए उपचुनाव में उनकी पत्नी नीलम देवी ने जीत दर्ज की थी।

बाद में इस मामले में पटना हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद अनंत सिंह के चुनाव लड़ने का रास्ता साफ हुआ। इसके बाद वह फिर बिहार की राजनीति में सक्रिय हो गए।

सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार ने क्या कहा?

अनंत सिंह की जमानत रद्द करने की मांग वाली याचिका में दुलारचंद यादव के पोते की ओर से दलील दी गई है कि हाईकोर्ट ने जमानत देते समय अनंत सिंह के आपराधिक इतिहास पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया।

रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने अनंत सिंह और बिहार सरकार को नोटिस जारी किया था। राज्य सरकार ने अपने जवाब में दुलारचंद यादव हत्याकांड की जांच और अनंत सिंह के खिलाफ दर्ज मामलों का उल्लेख किया है। सरकार का पक्ष इस मामले में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

हालांकि, जमानत रद्द होगी या नहीं, इसका फैसला सुप्रीम कोर्ट सुनवाई और उपलब्ध तथ्यों पर विचार करने के बाद ही करेगा।

क्या अनंत सिंह को फिर जाना पड़ सकता है जेल?

जमानत रद्द करने की याचिका पर सुनवाई के साथ अनंत सिंह के राजनीतिक और कानूनी भविष्य को लेकर अटकलें तेज हैं। एक ओर जेडीयू से जुड़े विवाद ने उनकी राजनीतिक स्थिति को प्रभावित किया है, वहीं दूसरी ओर दुलारचंद यादव हत्याकांड में जमानत को चुनौती दिए जाने से उनकी कानूनी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

फिलहाल, यह कहना जल्दबाजी होगी कि उन्हें दोबारा जेल जाना पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट का फैसला ही तय करेगा कि उनकी जमानत बरकरार रहेगी या उसमें बदलाव होगा।

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