सऊदी अरब ने मुसलमान देश पर क्यों दी बमबारी, किस बात पर इतना भड़का मामला

इजरायल के बाद अब दो मुस्लिम देशों के लिए यमन युद्ध का मैदान बनता जा रहा है। सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन एमबीएस की सेना ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के समर्थन वाले अलगाववादी समूह पर जमकर बमबारी की है. सऊदी अरब ने यमन के बंदरगाह शहर मुकाला पर एक अलगाववादी संगठन के लिए संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से आई हथियारों की खेप को निशाना बनाकर बमबारी की।
यह हमला सऊदी अरब और यूएई समर्थित ‘‘सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल’ (एसटीसी) के बीच तनाव और बढ़ने का संकेत देता है। इससे रियाद और अबू धाबी के रिश्तों में भी तनाव बढ़ने का संकेत मिलता है। यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के खिलाफ एक दशक से जारी युद्ध में दोनों देश अलग-अलग पक्षों का समर्थन करते रहे हैं।
सरकारी ‘सऊदी प्रेस एजेंसी’ की एक रिपोर्ट में जारी सेना के बयान के अनुसार, यह कार्रवाई तब की गई जब फुजैरा (यूएई के पूर्वी तट का एक बंदरगाह शहर) से पोत मुकाला पहुंचे। बयान में कहा गया, ‘‘सुरक्षा एवं स्थिरता के लिए खतरा पैदा करने वाले इन हथियारों से उत्पन्न खतरे को देखते हुए ‘कोलिशन एयर फोर्सेस’ ने आज सुबह एक सीमित सैन्य अभियान चलाया और अल-मुकाला बंदरगाह पर दो पोत से उतारे गए हथियारों तथा लड़ाकू वाहनों को निशाना बनाया।’ इस मामले में यूएई ने तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
अब तक यह साफ नहीं है कि इस हमले में कितना नुकसान हुआ है और कितने जानें गई हैं। हालांकि इस हमले में पहले से ही युद्धग्रस्त देश में नया तनावव जरूर पैदा हो गया है। सऊदी अरब के नेतृत्व वाला गठबंधन एक दशक से ज्यादा से ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों का मुकाबला कर रहा है। वहीं एसटीसी ने कहा है कि शुक्रवार को उसके लड़ाके पूर्वी हद्रामौत में घात लगाकर किए गए हमले के बाद अभियान चला रहे थे।
सऊदी अरब की बमबारी और इजरायली हमलों के बीच यमन के बंटवारे का संकट बढ़ गया है। दक्षिण में एसटीसी की ताकत बढ़ी है तो हूती विद्रोही उत्तर में मजबूत हो गए हैं। ऐसे में यमन दो भागों में टूट भी सकता है। 1990 में ही उत्तरी और दक्षिणी यमन का एकीकरण हुआ था। वहीं चार साल बाद गृहयुद्ध शुरू हो गया जिसमें उत्तरी यमन मजबूती केसाथ उभरा। 2004 में यमन में हूतियों का आंदोलन शुरू हुआ। 2014 में हूतियों ने राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था। राष्ट्रपति हादी सऊदी अरब चले गए और तब सऊदी के नेतृत्व वाले गठबधन ने हूतियों पर हमले शुरू किए। दक्षिण यमन में यूएई समर्थित एसटीसी ने सरकार से टकराव शुरू कर दिया। 2022 में दोनों गुटों में अस्थायी युद्धविराम लागू हुआ था।



