अवैध बॉक्साइट उत्खनन की जांच के दौरान मारपीट से ग्रामीण की मौत

रायपुर। बलरामपुर–रामानुजगंज जिले में अवैध बॉक्साइट उत्खनन की जांच के दौरान मारपीट से ग्रामीण की मौत और दो लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की घटना ने प्रदेश की राजनीति गरमा दी है। घटना को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर तीखा हमला बोला है, जबकि भाजपा ने कहा है कि जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के मुताबिक, रविवार–सोमवार की दरमियानी रात करीब 2 बजे कुसमी ब्लॉक के ग्राम हंसपुर में अवैध बॉक्साइट खनन की सूचना पर एसडीएम करुण कुमार डहरिया अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे थे।
इस दौरान सरना स्थल के पास खेत से लौट रहे तीन ग्रामीण रामनरेश राम (उम्र 62 वर्ष), अजीत उरांव (उम्र 60 वर्ष) और आकाश अगरिया (उम्र 20 वर्ष) को रोककर उनसे पूछताछ की गई। प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि अवैध उत्खनन का आरोप लगाते हुए एसडीएम और उनके साथ मौजूद लोगों ने रॉड, डंडों और लात-घूंसों से उनकी पिटाई की। इस दौरान तीनों ग्रामीण बेहोश हो गए। उन्हें तत्काल कुसमी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान रामनरेश राम की मौत हो गई। अन्य दो घायल ग्रामीणों का उपचार जारी है।
घायल आकाश अगरिया और अजीत उरांव का कहना है कि वे गेहूं के खेत में सिंचाई कर लौट रहे थे और बिना किसी ठोस पूछताछ या जांच के उन पर हमला किया गया।
सूत्रों के मुताबिक मारपीट में ग्रामीणों के घायल होने के बाद एसडीएम ने सामरी के नायब तहसीलदार पारस शर्मा को भी फोन कर बुलवाया ताकि यह दिखाया जा सके की पूरा राजस्व अमला अवैध खनन की जांच के लिए गया हुआ था। घटना सामने आने के बाद कुसमी एसडीएम करुण डहरिया, सामरी के नायब तहसीलदार पारस शर्मा और उनके साथ मौजूद निजी लोगों को राजपुर थाना पुलिस ने हिरासत में लिया है।
जिले के पुलिस अधीक्षक वैभव बैंकर ने कहा है कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, चाहे वह कितना भी बड़ा अधिकारी क्यों न हो।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर घटना को “प्रशासनिक आतंकवाद” करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासन में प्रशासनिक तंत्र बेलगाम हो गया है और निर्दोष ग्रामीण इसकी कीमत जान देकर चुका रहे हैं। बघेल ने अपने पोस्ट में कहा कि अवैध बॉक्साइट उत्खनन के मुद्दे पर पहले ग्रामीणों ने एक ट्रक पकड़ा था और उसी का परिणाम उन्हें भुगतना पड़ा। उन्होंने राज्य सरकार और अधिकारियों पर भ्रष्टाचार में लिप्त होने का भी आरोप लगाया।



