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ट्रंप का दबाव या मानवता की मिसाल? गाजा के घायलों का इलाज करेगा सबसे बड़ा मुस्लिम देश, क्या प्लान

नई दिल्ली. गाजा में इजरायली सुरक्षा बलों के जारी हमलों के बीच जहां हताहतों की संख्या बढ़ती जा रही है, वहीं दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम देश इंडोनेशिया ने जख्मी फिलिस्तीनियों की मदद करने के लिए हाथ बढ़ाया है। इंडोनेशियाई राष्ट्रपति के एक प्रवक्ता के अनुसार, इंडोनेशिया ने अपने एक खूबसूरत द्वीप पर घायल फिलिस्तानियों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की योजना बनाई है। इसके तहत गाजा के लगभग 2,000 घायल निवासियों को इस द्वीप पर लाकर इलाज किया जाएगा।

द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, इंडोनेशियाई राष्ट्रपति के प्रवक्ता हसन नासबी ने गुरुवार को जकार्ता में संवाददाताओं से कहा, “इंडोनेशिया युद्ध के शिकार, घायल और मलबे में दबे लगभग 2,000 गाजा निवासियों को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराएगा।” उन्होंने कहा कि इंडोनेशिया, सुमात्रा द्वीप के पास स्थित वियतनामी शरणार्थियों के लिए एक पूर्व शरणार्थी शिविर, गलांग द्वीप पर स्थित इस सुविधा को घायल गाजा निवासियों के इलाज और उनके परिवारों को अस्थायी रूप से आश्रय देने के लिए आवंटित करने की योजना बना रहा है। अब चर्चा इस बात की हो रही है कि इंडोनेशिया ने यह कदम ट्रंप के दबाव में उठाया है या मुस्लिमों के प्रति मानवता की मिसाल पेश कर रहा है?

बड़ी बात ये है कि इंडोनेसियाई प्रवक्ता ने कहा कि रोगियों के ठीक होने के बाद उन्हें गाजा वापस ले जाया जाएगा, हालाँकि उन्होंने योजना के समय या उनकी वापसी की गारंटी के बारे में कोई और जानकारी नहीं दी। बता दें कि मुस्लिम बहुल इंडोनेशिया ने अक्टूबर 2023 में इजरायल द्वारा शुरू किए गए हमले के बाद गाजा को मानवीय सहायता भेजी है। गाजा के स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि इजरायली हमलों में 61,020 फ़लिस्तीनी मारे गए हैं, जबकि 150,671 लोग घायल हुए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, 18 मार्च को इजरायल द्वारा गाजा में तीव्र हमलों को फिर से शुरू करने के बाद से कम से कम 9,519 फिलिस्तीनी मारे गए हैं और 38,630 अन्य घायल हुए हैं।

इंडोनेशिया की यह घोषणा जुलाई में एक्सियोस की एक रिपोर्ट के बाद आई है जिसमें बताया गया था कि इजरायल की मोसाद जासूसी एजेंसी के निदेशक ने इंडोनेशिया, लीबिया और इथियोपिया सहित कई देशों को गाजा से लाखों फ़िलिस्तीनियों को शरण देने के लिए मनाने में अमेरिका की मदद लेने के लिए वाशिंगटन का दौरा किया था। उस समय इंडोनेशियाई विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इस रिपोर्ट का स्पष्ट रूप से खंडन करते हुए कहा था कि सरकार ने इस तरह की योजना पर कभी किसी से चर्चा नहीं की।

इस हफ्ते की यह घोषणा इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो द्वारा घायल फ़िलिस्तीनियों को शरण देने के प्रस्ताव के कुछ महीने बाद आई है, जिसकी इंडोनेशिया के शीर्ष मौलवियों ने आलोचना की थी क्योंकि यह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के फ़िलिस्तीनियों को गाज़ा से स्थायी रूप से बाहर निकालने के सुझाव के बहुत क़रीब लग रहा है।

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