महादेव ऐप के नेटवर्क में बंटवारे की चर्चा, सौरभ की गिरफ्तारी के बाद बदले कारोबारी समीकरण

रायपुर। महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप के कथित प्रमुख प्रमोटर सौरभ चंद्राकर के ओमान से भारत प्रत्यर्पण के बाद इस नेटवर्क से जुड़े आर्थिक लेन-देन और संपत्तियों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, कारोबारी साझेदारों और नेटवर्क से जुड़े लोगों के बीच निवेश तथा बड़ी रकम पर नियंत्रण को लेकर मतभेद सामने आ रहे हैं। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
बताया जा रहा है कि सौरभ चंद्राकर और दूसरे प्रमुख प्रमोटर रवि उप्पल के कारोबारी संबंध पहले ही अलग हो चुके थे। रायगढ़ के अनिल अग्रवाल उर्फ अतुल और शुभम सोनी सहित कुछ लोगों के रवि उप्पल के साथ होने की चर्चा है। सूत्रों का दावा है कि सट्टेबाजी से अर्जित कथित अवैध धनराशि का निवेश शेयर बाजार, होटल, खदानों और कंपनियों में किया गया है। इन संपत्तियों पर नियंत्रण को लेकर नेटवर्क में खींचतान की बात कही जा रही है।
विदेशी पासपोर्ट में मिला अजंता मेंडिस नाम
जांच में सौरभ के कब्जे से कथित इंडोनेशियाई पासपोर्ट मिलने की जानकारी सामने आई है। इसमें ‘अजंता मेंडिस’ नाम और 11 मार्च 1998 की जन्मतिथि दर्ज बताई गई है। पासपोर्ट 21 जून 2024 को जारी हुआ था। सीबीआई ने अदालत में इस दस्तावेज को जब्त करने की जानकारी दी है। अब इसकी वास्तविकता और इसे हासिल करने में इस्तेमाल दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
ओमान से भारत लाया गया सौरभ
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सौरभ को 18 जून 2026 को मस्कट में हिरासत में लिया गया था। एक नवंबर को सीबीआई उसे भारत लेकर पहुंची। दो नवंबर को दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत ने दो दिन की ट्रांजिट रिमांड दी।
भिलाई निवासी सौरभ वर्ष 2019 में दुबई गया था। आरोप है कि वहां से उसने महादेव ऐप नेटवर्क संचालित किया। फिलहाल ईडी, सीबीआई, ईओडब्ल्यू और पुलिस इस मामले की जांच कर रही हैं। जांच एजेंसियों के सामने अब कथित अवैध कमाई, विदेशी संपर्क, निवेश और नेटवर्क में शामिल लोगों की भूमिका का पता लगाना अहम चुनौती है।



