भारत

अब पानी के लिए नहीं भटकेंगे पेंच के वन्य प्राणी

भोपाल । सिवनी जिले के पेंच नेशनल पार्क में वन्य प्राणियों को पीने के पानी के लिए भटकना नही पड़ेगा। पेंच प्रबंधन ने गर्मी में पेंच के हर दो वर्ग किलोमीटर में पानी की व्यवस्था करने के इंतजाम किए हैं। पार्क प्रबंधन के अनुसार गर्मी के मौसम में पेंच के अधिकांश प्राकृतिक जलस्रोत सूख जाते हैं। इससे वन्यप्राणी पानी की तलाश में गांव की तरफ भटक जाते हैं। वहीं हिंसक वन्यप्राणी के गांव में जाने से बड़ी घटना होने की संभावना रहती है। इसे देखते हुए बरसाती नाले में बंधान का काम किया गया है। साथ ही सोलर पैनल लगाए गए है। इसकी मदद से टाकों में पानी भरे जाने की व्यवस्था की गई है। साथ ही जरूरत पडऩे पर टेंकर के माध्यम से भी टाकों, पोखर व सोंसर में पानी भरवाया जाएगा, ताकि वन्यप्राणी पानी की तलाश में गांव की तरफ न जाएं।
पेंच टाइगर रिजर्व में स्थित नदी, नालों का पानी रोकने छोटे-छोटे बांध बनाए गए हैं। जिनमे पानी एकत्रित किया जा रहा है, ताकि वन्य प्राणियों को गर्मी में राहत मिले।पेंच पार्क से लगे महाराष्ट्र सीमा के तोतलाडोह जलाशय का पानी भी इस समय पर्याप्त है।ऐसे में यह गर्मी में वन्यप्राणियों को काफी राहत देगा। इसके अलावा जल संचय के लिए हैंडपंप का उपयोग भी किया जाएगा। जानकारी के अनुसार प्रतिदिन सुबह शाम हैंडपंप से पानी निकालकर उसे गहरे गड्ढे में संरक्षित किया जाएगा।पेंच नेशनल पार्क के डिप्टी डायरेक्टर रजनीश कुमार सिंह ने बताया की पेंच टाइगर रिजर्व में तालाब, झिरिया, हैंडपंप और नदी-नाले सहित चार सौ से ज्यादा जलस्रोत स्थित हैं। इस समय सभी जलस्त्रोतों की स्थिति अच्छी है। कुछ ही जलस्रोतों में पानी का जलस्तर कम हुआ है। वर्षाकाल में अच्छी वर्षा होने के कारण सभी जलस्त्रोतों में जलस्तर फिलहाल संतोषजनक है। महाराष्ट्र सीमा से लगे पेंच टाइगर रिजर्व में पानी की समस्या से निपटने के लिए पेंच पार्क प्रबंधन पानी के टेंकर से भी वन्य प्राणियों के लिए पानी की व्यवस्था करेगा। पेंच टाइगर रिजर्व के एसडीओ आशीष पांडे ने बताया है कि पेंच से लगे गांवों के लोगों को गर्मी के समय महुआ आदि बीनने के दौरान आग नहीं लगाने, गांव के आसपास बाघ या अन्य वन्यप्राणी दिखाई दे तो इसकी सूचना तत्काल देने की समझाइश दी जाएगी।

Show More

Related Articles

Back to top button