खेल जगत

उन्हें बॉक्सिग ग्लव पहना दो… अंपायर स्टीव बकनर से जुड़े सवाल पर सचिन का मजेदार जवाब

सचिन तेंदुलकर ने रेडिट पर ‘आस्क मी एनीथिंग’ (AMA) सेशन के दौरान फैंस के तमाम सवालों का जवाब दिया। इस तरह का मौका हो और अंपायर स्टीव बकनर का जिक्र न हो, ये कैसे हो सकता है। एक फैन ने आखिरकार उनसे पूछ ही लिया कि स्टीव बकनर पर कोई कॉमेंट? इसके जवाब में सचिन तेंदुलकर ने बहुत ही मजेदार जवाब दिया।

बकनर भारत और खासकर सचिन तेंदुलकर के खिलाफ विवादित फैसलों के लिए जाने जाते थे। उस जमाने में डीआरएस तो था नहीं, अगर वह होता तो महान बल्लेबाज सचिन के नाम न जाने कितने और रन और शतक होते। बात सिर्फ बकनर तक सीमित नहीं थी, कई दूसरे अंपायर भी सचिन के खिलाफ विवादित फैसलों के लिए कुख्यात थे।

गेंद हेल्मेट से लगकर गई और आउट। कंधे से टकराई और कैच आउट। नंगी आंखों से दिख रहा कि गेंद स्टंप मिस कर रही लेकिन एलबीडब्लू….। सचिन को अपने करियर में ऐसे तमाम मौकों का सामना करना पड़ा। लेकिन वह जितने महान बल्लेबाज थे, उतने ही ट्रू जेंटलमैन भी। अंपायर की उंगली उठी तो वह बिना कोई प्रतिक्रिया किए पवैलियन लौट जाया करते थे। विडंबना देखिए कि जो सचिन तेंदुलकर आउट होने पर अंपायर के फैसले का इंतजार किए बिना खुद ही पवैलियन का रुख कर लिया करते थे, उसी महान बल्लेबाज के खिलाफ कुछ अंपायर अक्सर विवादित फैसले दिया करते थे।

खैर, बकनर के जिक्र पर सचिन तेंदुलकर ने स्माइली के साथ जवाब दिया, ‘जब मैं बैटिंग करूं तो उन्हें बॉक्सिंग ग्लव पहना दो (ताकि वह उंगली नहीं उठा सके।)’

इस दौरान एक फैन ने पूछा कि क्या उन्होंने गेंदबाज की लय को तोड़ने या उसके रिएक्शन को जांचने के लिए कभी फॉल्स शॉट खेला है। इस पर सचिन ने कहा, ‘हां, कई मौकों पर मैंने गेंदबाज का रिदम तोड़ने के लिए जोखिम भरे शॉट खेले। एक याद आ रहा है जब 2000 में नैरोबी में मैकग्रा के खिलाफ खेला था।’

सचिन जिस मैच की बात कर रहे थे वह 2000 के चैंपियंस ट्रॉफी का ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ क्वार्टर फाइनल था। उस मैच में सचिन और सौरव गांगुली ने भारत को ठोस शुरुआत दिलाई थी। उस मैच में मैकग्रा विकेट के लिए तरस गए थे। वह लगातार सचिन को आउट करने की कोशिश कर रहे थे लेकिन नाकाम रहे थे।

सचिन-गांगुली ने पहले विकेट के लिए 66 रन की साझेदारी की। मास्टर-ब्लास्टर के रूप में पहला विकेट गिरा था और वह ब्रेट ली का शिकार बने थे। सचिन ने 37 गेंदों में 3 चौकों और 3 छक्कों की मदद से 38 रन बनाए थे। उस मैच में युवराज सिंह ने 80 गेंद में 84 रन की पारी खेली थी। भारत ने निर्धारित 50 ओवर में 9 विकेट पर 265 रन का स्कोर खड़ा किया था और जवाब में ऑस्ट्रेलिया की टीम 245 पर ऑलआउट हो गई थी। भारत 20 रन से मैच जीतकर सेमीफाइनल में पहुंचा था।

Show More

Related Articles

Back to top button