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खरा सोना चाहिए, ताे देने होंगे हर जेवर पर 55 रुपए ज्यादा

रायपुर। सोना लेने के बाद ठगे जाने की अब बात पुरानी हो गई है। अब महज 55 रुपए में ही सोने की शुद्धता की गारंटी मिलती है। अब सोने से बने जेवरों पर हॉलमार्क जरूरी है। यूं तो देश के साथ प्रदेश में पहले से ही हॉलमार्क वाले जेवर बिक रहे हैं, लेकिन इसकी अनिवार्यता न होने के कारण इस पर सराफा कारोबारी गंभीर नहीं थे। लेकिन अब केंद्र सरकार ने नियम ही बना दिया है कि सोने के जेवर बेचने वालों को हर हाल में हॉलमार्क वाले जेवर ही बेचने होंगे। इसके लिए एक शुल्क भी तय है। प्रति नग पर 45 रुपए और 18 प्रतिशत जीएसटी लगती है। ऐसे में 53.10 रुपए का शुल्क होता है। ग्राहकों से इसके लिए बिल में 55 रुपए लिखकर लिए जा रहे हैं। ग्राहकों को 55 रुपए खर्च करके कम से कम सोने के शुद्ध होने का प्रमाण मिल जा रहा है।

भारी कीमत देकर सोना या सोने के जेवर लेने वालों को शुद्ध सोना मिल सके इसी को ध्यान में रखते हुए ही केंद्र सरकार से हॉलमार्क को इस साल से अनिवार्य किया है। इसके अनिवार्य होने का सबसे बड़ा फायदा ग्राहकों को मिल रहा है। अब ग्राहक शुद्धता के नाम पर ठगने जाने से बच रहे हैं।

कोड बताएगा कितने कैरेट का सोना

सोने के जेवरों में जो हॉलमार्क रहता है, उससे ही जानकारी मिल जाती है कि ग्राहक जो जेवर ले रहे हैं, वो कितने कैरेट के बने हैं, क्योंकि हॉलमार्क में इसके लिए अलग-अलग कोड रहते हैं। इससे सोने के जेवरों की पहचान हो जाती है कि वह कितने कैरेट का है साथ ही यह भी जानकारी हो जाती है कि वह कितना शुद्ध है। अगर किसी जेवर पर पर 22K916 लिखा है, इसका मतलब ये हुआ कि यह 22 कैरेट सोना है और यह 91.6% शुद्ध है। इसी तरह से अगर किसी जेवर पर 18K750 लिखा है, इसका मतलब ये हुआ कि यह 18 कैरेट सोना है और यह 75% शुद्ध है। अगर किसी सोने के जेवर पर 14K585 लिखा है, इसका मतलब ये हुआ कि यह 14 कैरेट सोना है और यह 58.5% शुद्ध है। वैसे 24 कैरेट का सोना ही सबसे शुद्ध माना जाता है।

अब 6 अंकों वाली हॉलमार्किंग ही मान्य

हॉलमार्क वाला सोना यूं तो पिछले दो साल से बिक रहा है। 16 जून 2021 तक सोने की हॉलमार्किंग करना जरूरी नहीं था। ये सोना खरीदने और बेचने वालों की इच्छा पर निर्भर करता था। तब एचयूआईडी का नंबर 4 अंकों का रहता था। इसके बाद 1 जुलाई 2021 से हॉलमार्क का नंबर 6 अंकों का कर दिया गया। अब छह अंकों वाला नंबर ही चल रहा। इस नए नियम को लागू होने से पहले चार अंकों वाले जेवरों का स्टॉक समाप्त करने के लिए एक साल नौ महीने का समय दिया गया था। लेकिन सराफा कारोबारियों के पास इसका स्टॉक बचा होने के कारण उनको तीन माह का समय देते हुए इसको हर हाल में इस साल जून तक समाप्त करने के लिए कहा गया था। एक जुलाई से पुराना स्टॉक पूरी तरह से प्रतिबंधित है। अब किसी के पास पुराना स्टॉक बचा भी नहीं है।

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