हमर छत्तीसगढ़

आरोप लगे हैं तो जांच तो होनी ही चाहिए

भ्रष्टाचार के मामले में साय सरकार की नीति जीरो टालरेंस की है। इस बात से कोई इंकार नहीं कर सकता कि साय सरकार ने पहले दिन से यह साफ कर दिया था कि पिछली सरकार के समय जहां जहां जैसा जैसा भ्रष्टाचार हुआ वहां पर अब कोई भ्रष्टाचार नहीं होगा। चाहे शराब नीति का मामला हो, पीएससी में गड़ब़ड़ी का मामला हो।सरकारी दफ्तरों में होने वाले रोज के भ्रष्टाचार हो,भ्रष्टाचार की शिकायत मिलनेे पर कार्रवाई की बात हो तो माना जा सकता है कि साय सरकार भ्रष्टाचार रोकने के लिए पूरी गंभीरता से काम किया है, इससे जनता में संदेश गया है कि साय सरकार के रहते राज्य में भ्रष्टाचार पहले की तरह आसान तो नहीं है।ऐसे में जंबूरी आयोजन में ठेका देने के मामले में जो गड़बड़ी के आरोप लगाए गए हैं, उसकी जांच तो हाेनी  चाहिए ताकि सच क्या है जनता के सामने आ सके।

पांच दिवसीय जंबूरी का आयोजन पूरा हो गया है।सीएम साय ने इस मौके पर कहा है कि स्काउट जीवन पध्दति है जो हमें चुनौतियों से जूझना सिखाती है।इस बात में दो मत नहीं है कि राज्य के बालोद जिले में आयोजित जंबूरी आयोजन की दृष्टि से सफल रहा है। बड़ा आयोजन हो तो छोटी मोटी शिकायतें तो रहती है, इन छोटी मोटी शिकायतों को छोड़ दिया जाए तो आयोजन की सराहना की जा सकती है। आयोजन के दौरान साथ साथ बिना टेंडर के हुए काम को लेकर जो कुछ कहा जाता रहा है, उसकी खूब चर्चा भी रही। कैंप एरिया में ढाई करोड के टायलेट लगाकर घोटाले के आरोप पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल का कहना है कि मैंने जो मुद्दे उठाए थे,वह सब सही साबित हो रहे हैं।जो भी सक्षम अथारिटी है,उसे इस मामले में कार्रवाई करनी चाहिए।

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