
मुंबई। बॉलीवुड अभिनेत्री हुमा कुरैशी एक बार फिर अपने बेबाक विचारों को लेकर चर्चा में हैं। दिल्ली में CJP के विरोध-प्रदर्शन के बीच अभिनेत्री ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर लोकतंत्र, नागरिक अधिकारों और शांतिपूर्ण विरोध के महत्व पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर नागरिक को सवाल पूछने, असहमति जताने और जवाबदेही की मांग करने का अधिकार मिलना चाहिए।
शांतिपूर्ण विरोध को बताया लोकतांत्रिक अधिकार
हुमा कुरैशी ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर साझा पोस्ट में भारत को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र बताते हुए शांतिपूर्ण विरोध को नागरिकों का बुनियादी अधिकार बताया। उन्होंने अपने संदेश में जोर दिया कि सवाल पूछना और जवाबदेही की मांग करना कोई अपराध नहीं है।
अभिनेत्री के मुताबिक, लोकतंत्र में नागरिकों को बिना किसी डर या उत्पीड़न के अपनी बात रखने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि शांतिपूर्ण विरोध को दबाने से लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुंचता है।
‘मैं किसी राजनीतिक पार्टी के साथ नहीं हूं’
अपनी पोस्ट में हुमा ने राजनीतिक समर्थन को लेकर भी अपना रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि वह किसी राजनीतिक पार्टी या व्यक्ति के पक्ष में नहीं, बल्कि उन नागरिकों के साथ खड़ी हैं जो जवाबदेही की मांग करते हैं और अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करते हैं।
अभिनेत्री ने यह भी कहा कि देश के प्रति उनका प्यार ही उन्हें अपनी बात रखने के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने माना कि खुलकर अपनी राय रखने पर गाली-गलौज, निजी हमलों या पेशेवर नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। इसके बावजूद उन्होंने अपनी बात रखने पर पछतावा नहीं होने की बात कही।
‘देशभक्ति का मतलब चुप रहना नहीं’
हुमा कुरैशी ने अपने संदेश में देशभक्ति और लोकतंत्र को लेकर एक अहम बात कही। उनके मुताबिक, देश से प्यार करने का अर्थ चुप रहना नहीं है और लोकतंत्र का मतलब हर बात को बिना सवाल किए स्वीकार करना भी नहीं है।
उन्होंने असहमति को देश-विरोधी मानने की सोच पर सवाल उठाते हुए नागरिक स्वतंत्रता और जवाबदेही के महत्व को रेखांकित किया। उनकी इस पोस्ट का मुख्य संदेश यही है कि लोकतंत्र में हर नागरिक को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाने और सवाल पूछने का अधिकार होना चाहिए।



