हमर छत्तीसगढ़

पूर्व सीएम की नाराजगी पर डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कसा तंज

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर से हलचल मच गई है। कांग्रेस की पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी की बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं पर सरकार के खिलाफ निष्क्रिय रहने का आरोप लगाते हुए जमकर नाराजगी जाहिर की। इसपर अब उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने तंज कसा है। उन्होंने कहा कि भूपेश बघेल को खुद के अंदर झांकना चाहिए। जिनकी गलतियों के कारण उनकी सरकार चली गई वो आज दूसरे से प्रश्न कर रहे हैं। क्या उन्हें जनता ने सेवा करने के लिए सत्ता में भेजा था या शराब और कोयला का भ्रष्टाचार करने के लिए? विजय शर्मा ने आगे कहा कि भूपेश बघेल चिल्लाकर सबको दबा देंगे सोचते हैं। उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत का बचाव करते हुए कहा कि वे सज्जन व्यक्ति हैं। बता दें कि आज राजीव भवन में कांग्रेस प्रभारी सचिन पायलट की मौजूदगी छत्तीसगढ़ कांग्रेस पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी बैठक आयोजित की गई। बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जमकर भड़क उठे। उन्होंने राज्य के कुछ बड़े नेताओं की चुप्पी को लेकर अपनी कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। सूत्रों के मुताबिक बघेल ने कहा- मुख्यमंत्री पर सीधा हमले करने से हमारे ही कुछ सीनियर नेता बचते रहते हैं। वे राज्य के मुद्दों और सरकार के खिलाफ सीधा हमला नहीं करते। ऐसे में जनता के बीच हम अपनी मजबूत मौजूदगी कैसे दर्ज कराएंगे?

बघेल ने कहा कि मीडिया में बयान देना हो या फिर सोशल मीडिया पर कुछ लिखना या सड़क पर मुखर होकर उतरना या सदन में घेरना। कुछ नेता ऐसे हैं जो बड़े मौकों पर शांत रह जाते हैं साधारण तरीके से विरोध दर्ज कराते हैं। अगर हमें जनहित के मुद्दों पर लड़ना है, राज्य सरकार के खिलाफ लड़ना है, तो सीधे सरकार को, मुख्यमंत्री को टारगेट करना होगा।

वहीं बैठक के दौरान कुछ सीनियर नेताओं इस बात को लेकर भी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें तो किसी तरह की जिम्मेदारी ही नहीं दी जा रही है। जबकि सीनियर नेताओं के अनुभवों का लाभ लेना चाहिए। लेकिन देखने में यह मिल रहा है कि सीनियर नेताओं की ठीक से पूछ-परख नहीं हो रही है। ऐसे में समन्वय कैसे बनेगा ?पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी की बैठक के बाद पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने भी भूपेश बघेल के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि पहले मुख्यमंत्री पर सीधे हमला किया जाता था, आज व्यक्तिगत हमला नहीं होता। सत्ता के मुखिया और प्रमुख लोगों पर कोई सवाल नहीं होता है।

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